भारतीय लोग खुद का संविधान लिखकर दिखाए तो मानू... ? - HUMAN

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Wednesday, 21 March 2018

भारतीय लोग खुद का संविधान लिखकर दिखाए तो मानू... ?

harshu


          १९१९ का भारत शासन कानून,प्रथम महायुद्ध की खलबलाहट, और भारतीयो का तीव्र संताप इन सब की पार्श्वभूमी पर तत्कालीन भारतीय राजकारण का हल खोजने हेतू १६२७ मे सायमन कमिशन नियुक्त किया गया | उसमे भारतीय सदस्य ना होणे की वजह से कॉंग्रेस ने कामिशनपर बहिष्कार डाला | भारतीय जनता का अंतर्गत कलह देखते हुये तत्कालीन भारतमंत्री लॉर्ड बर्कनहेड ने कहा 'भारतीय लोग खुद का संविधान बनाके दिखाए तो मानू'| यह बात तत्कालीन भारतीय नेता के स्वाभिमान को चूर करनेवाली थी |मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व मे भारतीय संविधान का मसुदा तैयार किया गया लेकीन वह सबको संतुष्ट नही कर सका | लाहोर मे सायमन कमिशन का विरोध करते दौरान लाला लजपतराय की मौत हुई |


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 अंतर्गत विरोध मे जलते हुये भारत को एकसूत्र मे बांधना बडा ही मुश्कील कार्य था | अपरंपार जातीयता, हिंदू - मुस्लीम, ५६२ संस्थान, १००० के उपर भाषाये इत्यादी कारणो की वजह से भारत एकसंघ नही हो पायेगा ऐसा शायद अंग्रेजो को लग रहा था | और ऐसा सोचना उनका स्वाभाविक भी था | डॉ. बाबासाहाब आंबेडकर जी ने हजारो जातियो को केवल ५ समूह मे समाविष्ट किया| यह काम किसी और द्वारा हो पाना उस वक्त मुमकिन ही नही था | १८ फरवरी १९२७ उन्होने मुंबई विधिमंडल के सदस्य के तौर पर शपथ ली | तब से भारतीय संविधान और कानून कैसा होणा चाहिये, उसके सखोल अध्ययन को आरंभ किया | इसके लिये उन्हे उधार लिये हुये किताबो की रकम अदा करणे के लिये खुद का चार मिनार मकान बेचना पडा| किताबो के लिये राजगृह बनाने वाले बाबासाहाब किताबो के लिये अपना घर भी बेच चुके थे | यहा पर उनका प्रज्वलित राष्ट्रीय दृष्टीकोन सामने आता है|




  ८ अगस्त १९४२ मे भारत छोडो आंदोलन पुरे देश मे फैल चुका था | दुसरे विश्वयुद्ध के बाद प्रधानमंत्री अॅटली ने लाॅर्ड पॅथिक लाॅरेन्स,सर स्टॅफोर्ड क्रिप्स, लॉर्ड ए. बी. अलेक्झांडर इन्हे समस्याये सुलझाने हेतू भारत भेजा | उन्होने कॅबिनेट मिशन योजना घोषित की| १९४६ को कॅबिनेट मिशन योजनांतर्गत भारत के लिये एक निर्वाचित घटना समिती स्थापित करणे का प्रस्ताव पारित किया गया | जुलाई १९४६ को घटना समिती की नियुक्तीया हुई | इन नियुक्तियो मे बाबासाहब को पराजित करणे की पूर्ण कोशिशे कॉंग्रेस द्वारा की गयी | सरदार पटेल कहते है '' घटना परिषद की सिर्फ दरवाजे और खिडकीया ही नही, प्रत्यक्ष झरोके भी मैने बंद करदिये है, देखते है अब आंबेडकर कैसे और कहा से घटना समिती मे प्रवेश करते है ''| लेकीन बेंगाल के जैसूर - खुलनार मतदार संघ से घटना समितीमे बाबासाहाब नियुक्त हुये | जोगेन्द्र्नाथ मंडल ने बाबासाहाब को नियुक्त करणे के लिये अपनी तरफ से जी जान से कोशिश की | ९ दिसंबर १९४६ से घटना समिती के कामकाज को प्रारंभ हुआ |


   पहले तो अध्यक्ष के पद पर सच्चिदानंद सिन्हा को नियुक्त किया गया था, लेकीन बाद मे ११ दिसंबर १९४६ को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को उसकी जगह नियुक्त किया गया| समिती मे कॉंग्रेस का संख्याबल अधिक होणे की वजह से उनकी जीम्मेदारीया भी अधिक बढी थी | १३ दिसंबर १९४६ को ध्येय उद्दिस्टो का ठराव रखा गया उसपर हुये वादविवाद से डॉ. राजेंद्र प्रसाद निराश हो गये थे | उन्होने मार्गदर्शन हेतू अचानक से बाबासाहाब को पाचारण किया | बाबासाहाब जी के उत्स्फूर्त भाषण से घटना समिती मंत्रमुग्ध हो गयी थी | सभीजन धन्य हुये | क्योंकी हम संविधान नही बना सकेंगे इस डर से सभी भयस्त थे | 'आयवर जेनिंग्ज' इस घटना तज्ञ से घटना लिख ले लेंगे ऐसा भी कुछ लोगो का सुझाव था |






     जैसूर - खुलणार यह प्रांत पाकिस्तान मे चला गया था उस कारण बाबासाहाब जी का सदस्यत्व अपने आप ही खत्म हो चुका था | उनके सामाजिक ज्ञान का और राष्ट्रीय गुणो का लाभ लेणे के अलावा दुसरा कोई विकल्प न था समिती के सद्स्यो के पास | बाबासाहाब जी को मुंबई से नियुक्त किया गया | ३ अगस्त १९४७ के सूची मे उनको मंत्री घोषित किया गया | २९ अगस्त  १९४७ को बाबासाहाब जी मसुदा समिती के अध्यक्ष बने | उस वक्त अमेरिकन संघराज्य, सांसदीय प्रणाली और कम्युनिस्ट एकाधिकारशाही ऐसे तीन शासन प्रकार प्रचलित थे | अगर संघराज्य पद्धती का स्वीकार करे तो दोहरी नागरिकता, दोहरा प्रशासन, दो संविधान, राज्यो का स्वावलंबत्व इत्यादी कारणो की वजह से राष्ट्र की एकात्मता को एक चुनौती थी | Confederation राज्य संघ नही कर सकते थे क्योंकी भारत अमरिका जैसे अनेक राज्यो की एकात्मता से नही बना है | इंग्लंड की राजेशाही स्वीकार करके वंशवाद की जडे नही बो पाते | वहा लिखित संविधान नही होता | वहा परंपरानुसार राजकारभार चलता है |कम्युनिझम  भारत के काम का नही था | इन सभी कारणो के सोच विचार के बाद India that is Bharat shall be a Union of State यह  वाक्यरचना पहिले ही कलम मे बाबासाहाब जी ने अंतर्भूत की | 

१) प्रजा की सार्वभौम सत्ता - '' हम भारतीय लोग ....'' ऐसे शब्दो मे सभी भारतीय जनता का सन्मान समान किया | २) समाजवादी -  ४२ वी संविधान दुरुस्तीने समाजवाद संकल्पना प्रस्तावना मे अंतर्भूत की गयी | गरीब - अमिरी के बीच का अंतर कम करना, संपत्ती का जरुरत मंदो तक न्याय वितरण करना | 
३)धर्मनिरपेक्षता-  किसी भी धर्म का प्रभाव प्रशासन पर नही रहेगा | 
४)लोकशाही-  नियुक्त हुये प्रतिनिधी राज्यकारभार हेतू जनता को जबाबदार रहेंगे |
५) गणराज्य-   गणराज्य मे राज्य  प्रमुख की नियुक्ती लोगोद्वारा होती है |
  
 साथ हि उद्दिस्त --- न्याय, स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा  इन तत्वो का भारतीयो ने पालन करना चाहिये |


  गांधीजी को वेद, चतुवर्ण जी-जान से प्यारे थे| मुलभूत अधिकार बहाल करना तत्कालीन सवर्णो को मान्य नही था | 
संविधान द्वारा दिये गये मुलभूत अधिकार .....
१) समता का अधिकार {कलम १४ - १८}
२)स्वतंत्रता का हक {कलम १९ - २२ }
३)शोषण विरुध्द का अधिकार {कलम २३ - २४}
४)संस्कृती और शिक्षा का अधिकार {कलम २९ - ३०}
५) घटनात्मक उपाय अधिकार {कलम ३२ }

    ३९५ कलम संविधान मे अंतर्भूत कर युगोयुगो से चला आ रहा धर्मो का नंगे नाच का बाबासाहाब जी ने खात्मा किया | संविधान सविस्तर लिख सब कुछ स्पष्ट किया न्यायालय मे अन्वयार्थ करते वक्त स्पष्टता रहणी चाहिये यह उद्देश |
राज्यो की शासन व्यवस्था स्पष्ट करणे के लिये १५२ - २३७ ऐसी ८६ कलमे लगी | मुलभूत अधिकार प्रकरण १२ - ३५ ऐसी २५ कलमो मे समाविष्ट है | राज्यनीति के  मार्गदर्शक तत्व इस प्रकरण के लिये ३६ - ५१ ऐसी १६ कलमे लगी | भाषा के लिये ७ कलम, मागास अनुसूचित जन जातियो सुविधावो के लिये १३ कलमे, नोकर वर्ग की तरतूद हेतू १६ कलम .... जैसे विस्तृत स्पष्टीकरण के कारण हेतू भारतीय संविधान अधिक स्पष्ट और बडा लिखना पडा |


   उनके संविधान लेखन कार्य के लिये डॉ. राजेंद्र प्रसाद कहते है ...'' अध्यक्ष पद धारण करते हुये और दैनंदिन कार्य का अवलोकन करते हुये एक बात मेरे ध्यान मे आयी , प्रारूप समिती के सदस्य विशेष तौर पर डॉ.आंबेडकर इन्होने उनकी तबियत ठीक न होणे के बावजुद भी जितने उत्साह और भक्ती से कार्य किया वह और कोई नही कर पाता, हमने जब उन्हे प्रारूप समिती मे लिया और अध्यक्ष पद पर विराजमान किया, तब हमारे इस निर्णय से अच्छा और कोई निर्णय हो ही नही सकता था ''|