हर महिला को पता होणे चाहिये उसके ये अधिकार ... - HUMAN

Breaking

Saturday, 21 April 2018

हर महिला को पता होणे चाहिये उसके ये अधिकार ...

                                           


           हमारा समाज स्त्री के लिये बहुत हि असुरक्षित है, फिर वो ८ महिने की मासूम बच्ची हो या ७० - साल की कोई वृद्ध महिला | हाल हि मे घटीत हुई वो उन्नाव केस हो या आसिफा सामुहिक बलात्कार कांड | पोलीस अधीक्षक भी इसमे शामिल थे | मतलब कानून के राखवालो से भी भारतीय स्त्री सुरक्षित नही है | इस देश मे हर २ मिनट मे एक लडकी यौन शोषण का  शिकार होती है | ऐसा नही है की इसके खिलाफ कोई कानून नही बना है ? कानून है ...लेकीन जानकारी के अभाव के कारण हम उसका इस्तेमाल अपने बचाव, सुरक्षा के लिये नही कर पाते | और इसके चलते किसी ना किसी प्रकार के उत्पिंडन का शिकार हम होते है |





* रात को नही कर सकते अरेस्ट - सुप्रीम के आदेश अनुसार सूर्यास्त  के बाद किसी भी महिला को अरेस्ट नही कर सकते | महिला पोलीस अधीक्षक भी नही कर सकती | अगर गुन्हा गंभीर स्वरूप का हुआ तो पहले लेखी अर्जी न्यायालय मे करणी होती है |


* अधिक समय बाद भी कर सकते है कम्प्लेंट - बहुत सी महिलाये समाज, घर परिवार या अन्य कारणो की वजह से घटना के तुरंत बाद शिकायत नही कर सकती, ऐसे वक्त महिला देर समय बाद भी क्म्प्लेंट कर सकती है | और ये शिकायत दर्ज करने से पोलीस इन्कार नही कर सकते | महिला इमेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कर सकती है | 




* गोपनीयता का अधिकार - रेप पिडीत महिला  प्रायव्हसी मे बयान दे सकती है | ऐसे मे मॅजिस्ट्रेट साथ मे रहते है | पिडीता लेडी काॅन्स्टेबल और पुलिस अधीक्षक को भी गुप्त बयान दे सकती है | पोलीस सबके सामने खासगी बयान देणे के लिये दबाव नही ला सकते |

* झीरो FIR का अधिकार - रेप पिडीत महिला को झीरो FIR का अधिकार है | ऐसे केस मे महिला किसी भी पोलीस स्टेशन मे शिकायत दर्ज कर सकती है |

* जाच पडताल के लिये नही बुला सकती - किसी भी महिला को जाच पडताल के लिये पोलीस स्टेशन नही बुला सकते | महिला की पडताल उसी के घर मे किसी किसी महिला पोलीस कर्मचारी के उपस्थिती मे हि की जा सकती है |

* प्रायव्हसी - रेप केसेस मे महिला की पहचान गोपनीय रखना आवश्यक है | पोलीस या मिडिया कोई भी महिला का नाम नही बता सकता |

  




 * प्रेग्नंट कर्मचारी को कंपनी नही काम से नही निकल सकती |

* किसी भी वक्त किसी भी हॉटेल मे आपको पिणे के पाणी की मांगने मांग करणे की इजाजत है | वाशरूम का भी इस्तेमाल कर सकते है | वो भी मुफ्त मे |

* कायदेसे किसी अविवाहित कपल को हॉटेल मे प्रवेश के लिये मना नही किया जा सकता |

* महिला  किसी के विरोध मे सीधे पोलीस आयुक्त या उपायुक्त की तरफ इमेल या राजीस्टर्ड़ पोस्ट के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकती है |

* किसी विवाहित पुरुष ने किसी अविवाहित महिला के साथ रिश्ता रखा वो गुनाह नही ठहराया जा सकता |

*लडका और लडकी को कायदे अनुसार समान संपत्ती मे हक होता है |

* शादी को कम से कम एक साल पुरा होणे तक कोई  विवाहित दम्पत्ती तलाक के लिये अर्जी नही कर सकता |

* पोलीस कर्मचारी ने किसी को अरेस्ट करते वक्त या जाच पडताल के वक्त वो पोलीस है ये ध्यान मे आणा चाहिये ऐसे कपडे परिधान करना या पहचान बताना आवश्यक है |

* सूर्यास्त से पहले या सूर्यास्त के बाद किसी महिला को अरेस्ट नही किया जा सकता |

* किसी महिला पर सिधे चरित्रहीनता का आरोप नही लगा सकते |




*सार्वजनिक जगह पर कीस करना या हग करना फौजदारी गुनाह नही है |

* आपकी शिकायत दर्ज ना करनेवाले या बात को टालणे की कोशिश करनेवाले पोलीस कर्मचारी को ६ महिने से लेकर २ साल तक का कारावास  हो सकता  है | 

* कोई भी विवाहित कपल दो लडके या दो लडकीया ( समलिंगी ) अडॉप्ट नही कर सकता | एक लडका और एक लडकी अडॉप्ट कर सकते है |

* अकेला पुरुष होनेपर वह लडकी गोद नही ले सकता |

* किसी को अगर अरेस्ट किया गया तो अरेस्ट करणे के पीछे की वजह जाणणे का उसे पुरा हक होता है |

* किसी का रेकॉर्डेड फोन कॉल कोर्ट मे सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है |

* गुनाह कही भी हुआ हो, फिर भी किसी पिडीत महिला को किसी भी जगह के पोलीस स्टेशन मे शिकायत दर्ज करणे का अधिकार होता है |




* बलात्कार या लैगिक अत्याचार के पीडिता को जवाबी बयान की नोंद के लिये पुलिस थाणे  मे जाने के लिये जबरदस्ती नही की जा सकती | 

*बलात्कार के मामले मे मुफ्त कायदे के राह से मदद लेणे का महिला को पूर्ण अधिकार होता है |

* बलात्कार पीडिता पुलिस मे तक्रार ना करते हुये पहले डॉक्टरी ट्रीटमेंट कर सकती है |

* बलात्कार हुआ या नही इसमे डॉक्टर का ओपिनिअन अंतिम सबूत नही माना जा सकता |

* ब्रिथलायझर पडताल को नकार करणे पर, किसी को मद्यपान करणे के जुल्म मे अटक करणे से पहले पुलिस को वारंट की जरुरत नही होती |

* महिला गुनहगार को सिर्फ महिला पुलिस कर्मचारी हि अरेस्ट कर सकती है, वो भी सुबह ६ बजे के बाद और शाम को ६ बजे से पहले | 

* किसी महिला फेर जाच पडताल के लिये कोर्ट मे नही बुलाया जा सकता उसके बदले घर मे उसका बयान लेना होता है |

* काम की जगह महिला और पुरुष दोनो को समान वेतन का हक होता है |


       हालात और सामाजिक स्थिती को देखते हुये हर महिला ने अपने ह्को के प्रती सजग रहना अति आवश्यक है, और दुसरी औरतो को भी सजग करना करना उनके ह्को के प्रती अत्यावश्यक है |पहले डॉक्टर्स के पास गर्भपात के लिये कॉल आती होगी तो कारण यह होता होगा की उसके दहेज के लिये पैसे कहा से लाउंगा या उसे पढा नही सकता और अब फोन उनके आया करेगा और कारण यह होगा मुझे बेटी नही चाहिये ... उसका रेप हो जायेगा| हम बेटो से तुलना करते वक्त हमेशा कहते है मेरी बेटी बेटे से कम नही, इसका मतलब हम मन मे पहले से हि तय कर रखते है की वो कम है |