ज्योतिबा फुले को जब कहा था सावित्रीबाई ने दुसरी शादी करणे : तब ज्योतीराव फुले ने दिया था का पुरुषप्रधान संस्कृती पर तमाचा मारता यह करारा जवाब - HUMAN

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Wednesday, 2 May 2018

ज्योतिबा फुले को जब कहा था सावित्रीबाई ने दुसरी शादी करणे : तब ज्योतीराव फुले ने दिया था का पुरुषप्रधान संस्कृती पर तमाचा मारता यह करारा जवाब


फुले दम्पत्ती द्वारा किये गये सामाजिक कार्यपर माहिती 


फुले पती - पत्नीने २८ जनवरी १८६३ को ' बालहत्या प्रतिबंध गृह ' की स्थापना की | इस गृह को जोड सूतिकागृह और अनाथ बच्चो के लिये बालकाश्रम स्थापन कर सावित्रीबाई ने विधवाओ के बच्चो का लालन पालन किया | अनेक विधवाओ का पुनर्विवाह कराया |

  विधवाओ का मुंडण कराने की कुप्रथा उस समय प्रचलित थी | ज्योतिबा फुले ने इस घातक कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाई | उसके लिये उन्होने उस समय के सनातनी लोगो को हम खुद ही अपने बहु बेटियो को कैसे छलते है यह बात समझाके देणे का प्रयास किया | लेकीन वह धर्ममार्तंड लोग सुनने के मनस्थिती मे नही थे | तब ज्योतिबा और सावित्री ने नाई लोगो का संप कराया | अर्थात हि नाई लोगो को इससे आर्थिक नुकसान होता | लेकीन ज्योतिबा और सवित्रिआई का सामाजिक कार्य मे समर्पण देख उन लोगो ने फुले दम्पत्ती का साथ दिया | उन्होने विधवाओ के बाल काटने से इन्कार कर दिया | वे संप मे सहभागी हुये | इस तरह से नाईयो का सफल तरीके संप कराके लाना यह बहुत हि बडी सामाजिक क्रांती थी |

दुसरी शादी की बात 


सवित्रिआई ' बालहत्या प्रतिबंध गृह'  के कार्य मे व्यस्त थी | उनकी उम्र बढ रही थी | अब वे ३५ साल की हो चुकी थी | उन्हे अभी एक भी संतान ना हुई थी | तत्कालीन समाज व्यवस्था को देखते हुये ज्योतिबा फुले के रीश्तेदार उनपर दुसरी शादी के लिये जोर डाल रहे थे | सावित्रीबाई ने भी ज्योतिबा फुले को दुसरी शादी के लिये आग्रह किया | लेकीन बच्चो के लिये दुसरी शादी करना यह बात ज्योतिबा फुले को बिलकुल भी मान्य नही थी | 

   ज्योतिबा ने सवित्रिआई से कहा, '' दुसरी शादी कर लेणे के बाद बच्चे होगे ही यह तुम कैसे कह सकती हो ? दोष मुझ मे भी तो हो सकता है |" इस जवाब से सावित्री आई खामोश हुई | 

  आगे ज्योतिबा फुले ने कहा - '' अपने समाज मे हर बात के लिये औरत को ही गुणहगार ठहराया जाता है | सती उसे हि होणा पडता है | पती के प्यार के खातीर वो सती होती है, लेकीन पत्नी के प्यार के खातीर किसी पुरुष को सता होते हुये देखा है क्या तुमने |"

 उस समय मे भी इतनी प्रगतीशील सोच महात्मा फुले जैसे महात्माओ की ही हो सकती है | स्त्री- पुरुष समानता प्रस्थापित करणे हेतू ज्योतिबा फुले ने अपना पूर्ण जीवन खर्चा किया | स्त्री के उपर होनेवाले मानवी जाच के  खिलाफ उनका लडा था | दुसरी शादी कर खुद के बिवी के साथ अन्याय करना यह उन्हे बिलकुल भी गवारा ना लगा | दुसरी शादी करणे से अच्छा किसी बच्चे को गोद लेने का उन्होने तय किया | सवित्रिआई को भी ज्योतिबा फुले की यह बात रास आयी | 



काशीबाई के बच्चे को गोद लिया 

  ' बालहत्या प्रतिबंध गृह' के बच्चो से सावित्रीआई को काफी लगाव हो चुका था | उनकी सेवा करणे मे नहाने खिलाने मे उन्हे अपार आनंद मिलता | उनकी वो दुसरी माता हि बन चुकी थी | 


  एक बार की बात है, अपना काम खत्म कर ज्योतिबा घर लौट रहे थे | नदी के पूल के उपर से गुजरते वक्त एक स्त्री जोर से चलते हुये उनके सामने से गुजरी | रात का वक्त और अकेली औरत इस कारण ज्योतिबा को संशय हुआ | वो भी उसके पीछे पीछे जोर से चलने लगे | थोडा अंतर चलने के बाद वो औरत नदी के कठडे पर खडी हुई | वो नदी मे कुदने हि वाली थी इतने मे ज्योतिबा ने उसे पीछे की और खीचा | '' इन्सान का जीवन किमती होता है, तुम क्यो जान देना चाहती हो ?" 

  ''मुझे नही जिना, मेरे हाथो से पाप हुआ है .. मुझे यह जीवन नही चाहिये|'' उस औरत ने कहा | 
  '' ऐसा कोनसा पाप हुआ तुम्हारे हाथ से क्या किया है तुमने ? तुम्हारे बाल नही है तुम विधवा हो क्या ?'' ज्योतिबा        फुले ने पूछा |
 '' हा ! मै विधवा हु | मै पेट से हु | मेरे हाथ से गुनाह हुआ है, मै बच के क्या करू ? कहा जाऊ ?" उस औरत ने कहा | 


  '' तुम मेरे घर चलो, तुम मेरे बेटी जैसी हो | मै और मेरी बिवी 'बालहत्या प्रतिबंध गृह ' चलाते है | , मेरी बिवी तुम्हारी देखभाल करेगी | तुम्हे किसी भी तरह की तकलीफ नही होगी |" ज्योतिबा फुले ने कहा | 

  उस औरत का नाम काशी था | समय बितते हि उसने एक सुंदर बच्चे को जन्म दिया | सावित्री आई और ज्योतिबा ने उस बच्चे के नाम यशवंत रखा | काशीबाई के इस बच्चे को गोद लेणे का विचार ज्योतिबा और सावित्रीआई इनके मन मे आया | उन्होने काशीबाई से पूछा | काशीबाई ने बडी हि खुशी से इजाजत दी | 

 इस बच्चे पर सावित्रीआई ने अपना पुरा ममत्व लुटाया | जाती, वंश, धर्म, परंपरा इनकी बंदिशे तोड मानवतावादी रिश्ता जोडणे वाली सावित्रीबाई जैसी महान हस्ती इस दुनिया मे पुनः पैदा होणा असंभव है |