१९३६ को मुंबई में दिया गया यह ऐतिहासिक भाषण जिसका उल्लेख दुनिया के प्रसिद्ध भाषणो में किया जाता है - HUMAN

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Tuesday, 22 May 2018

१९३६ को मुंबई में दिया गया यह ऐतिहासिक भाषण जिसका उल्लेख दुनिया के प्रसिद्ध भाषणो में किया जाता है


      डॉ.आंबेडकर किसी पर भी अपना मत जबरद्स्ती से पेलणे वालो में से नही थे | अपने धर्मांतरण का मत अपने समाज के लोगो के सामने रख उनकी इसपर क्या प्रतीक्रिया है , यह जानने कें लिये उन्होने ३० और ३१ मे १९३६ को मुंबई में महार परिषद का आयोजन किया | उस परिषद ने बाबासाहाब ने जो भाषण दिया, उसका आजतक दुनिया में विश्वविख्यात भाषण हुये उसमे इस अद्भुत, अद्वितीय, युगप्रवर्तक, दिग्विजयी और कालजयी  भाषण का उल्लेख किया जाता है | उस भाषण में अद्वितीय आवेश और नये युग कें शूरआत का गगनभेदी आत्मविश्वास था | डॉ. बाबासाहाब आंबेडकर उस भाषण में बिजली जैसे कड्के -

     '' छुआ छुत का सवाल यह वर्ग संघर्ष का सवाल है खुद को छुत और दुसरे को अछूत समझने वाले ऐसे दो वर्गो कें बीच का यह संघर्ष है | ''

   '' जो लोग खुद को पवित्र और हमे अपवित्र समझते है, खुद को उचा और हमे हिन नीच दर्जे का समझते है, उनके मान्यता अनुसार यह समाज व्यवस्था सनातन है और इसमे बदलाव नामुमकीन है, या होणा ही नही चाहिये | वह सदैव पवित्र और हम अपवित्र, वे सदैव उचे और हम सदैव नीच रहे ऐसी उनकी इच्छा है | जबतक हम हिंदू बनके रहे तबतक इस परिस्थिती में बदलाव संभव भी है क्या ? कालत्रयी संभव नही |''

   '' जबतक हम 'हिंदू' बनके रहेंगे तबतक ये जो हमपर भयंकर अन्याय हो रहा है,  इस अन्याय का प्रतिकार करना असंभव है | अन्याय का प्रतिकार करणे के लिये सामर्थ्य चाहिये | हमारे पास मनुष्यबल नही, द्रव्यबल नही और मानसिक बल भी नही | क्रांती के लिये आवश्यक इन तीनो बलो में सें एक भी हमारे पास नही | ''

  ''हिंदू धर्म की रचना ही मूलतः वर्गभेद पर अधिष्ठित है | एक मानव  ने दुसरे से कैसे बर्ताव करणा चाहिये इसकी आचारसंहिता हिंदू धर्म में बतायी गयी है , लेकीन एक व्यक्ती ने दुसरे से कैसे सदवर्तन करणा चाहिये इस बारे में हिंदू धर्म ने पूर्णतः मौन रखा है | ''


    '' जो धर्म एक को बुद्धिमान बनाने के लिये दुसरे को अज्ञानी रखने की सोच रखता हो , वो धर्म ना होके लोगो को बेवकूफ बनाने का षडयंत्र है | जो एक को शस्त्रो से सज्ज रखता हो दुसरे को निशस्त्र रखता हो वो धर्म ना होकर कुटील चालाखी है | जो धर्म कुछ लोगो को मनचाहे उतनी संपत्ती संग्रहित करणे की छुट देता हो और उसी वक्त किसी एक वर्ग को संपूर्णतः दुसरे के मर्जी से जिंदगी गुजारणे के लिये लाचार बनाता हो, वो धर्म ना होके स्वार्थी सोच कि परिसीमा है | जिस धर्म में एक विशिष्ट वर्ग को ज्ञान हासील करणे का, दुसरे वर्ग को शस्त्र धारण करणे का, तिसरे वर्ग को व्यापार करणे का और चौथे वर्ग को तिनो वर्गो कि सेवा करणे का कार्य सोपा गया है, ऐसे धर्म पर मेरा कदापी यकीन नही |''



  '' एक इन्सान ने दुसरे को इतना अपवित्र समझना की उसका स्पर्श भी उसे अमंगल लगे इस तरह की शिक्षा हिंदू धर्म के अलावा किसी और धर्म में नही | छुआ छुत हिंदू धर्म पर कलंक है ऐसा बहुत से लोग कहते है, लेकीन हिंदू धर्म खुद में ही एक कलंक है ऐसा एक हिंदू कहते हुये नही दिखता | "

    " हम में से जो भी मुसलमान या ख्रिश्चन बने, उन्हे हिंदू लोग अछूत नही समझते | लेकीन हम हिंदू धर्म को चीपके रहने के कारण ही हमे हिंदू अछूत समझा जाता है | और इसी कारण के वजह से मुसलमान और ख्रिश्चन इनके धर्म में समानता की शिक्षा होकर भी वे लोग भी हमे हीन, तुच्छ भावना से देखते है | धर्मांतर के अलावा इस भयावह गुलामी से मुक्ती का कोई और मार्ग नही | ''


    '' हिंदू धर्म मेरे बुद्धी और मन को रास नही आता , मानव धर्म के लिये नही तो धर्म मानव के लिये होता है, जिस धर्म में इंसानियत को जगह नही उस धर्म में हम क्यू रहे ? जो धर्म हमे मंदिर मी प्रवेश नही करणे देता उस धर्म  हम क्यू रहे ? जो धर्म हमे शिक्षा नही लेणे देता उस धर्म में हम क्यू रहे ? जो धर्म हमे नोकरी नही करणे देता उस धर्म में कीस कारण के वजह से हम रहे ? जो धर्म हमे राह राह पर अपमानित करता है उस धर्म में हम क्यू रहे ? हिंदू धर्म में सुधार करणे की अनेक सुधारवादी हिंदू की चाह है , ऐसा कहा जाता है | औरो की तो बात ही छोडो खुद गांधीजी अछुतो का छल करनेवालो को कायदे के अनुसार सजा देणे के खिलाफ है | इस बारे में अत्याचार करनेवाले हिंदू लोगो का मन दुखी ना हो ऐसी उनकी 'सदभावना' है | इस अत्याधिक हीन दर्जे से छुटकारा पाने का एकमेव पर्याय मतलब धर्मांतरण |राजकीय स्वतंत्रता की भारत को जितनी जरुरत है उतनी ही जरुरत अछूत समाज को सामाजिक स्वतंत्रता की है | स्वराज्य और धर्मांतरण आंदोलन दोनोही परस्परपूरक है | दोनोही आंदोलन का एक ही उद्देश है- स्वतंत्रता और समानता | ''

     इस परिषद में इस ऐतिहासिक भाषण कें बाद धर्मांतर करणे का प्रस्ताव मंजूर किया गया |