गांधी की असलीयत बया करता डॉ. आंबेडकर और गांधी के बीच का यह परिसंवाद ..(गांधी और आंबेडकर ,भाग -१ ) - HUMAN

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Monday, 7 May 2018

गांधी की असलीयत बया करता डॉ. आंबेडकर और गांधी के बीच का यह परिसंवाद ..(गांधी और आंबेडकर ,भाग -१ )

गांधी और डॉ. आंबेडकर के बीच का परिसंवाद 

दुसरी गोलमेज परिषद अब लंदन मे होनेवाली थी | डॉ. आंबेडकर इस परिषद मे सहभागी होनेवाले थे | १५ अगस्त १९३१ को वे गोलमेज परिषद के लिये रवाना हुये | लेकीन रवाना होणे से पहले महात्मा गांधी ने ६ अगस्त १९३१ को बाबासाहाब को मिलने का विचार जाहीर किया | इस तरह १४ अगस्त १९३१ को मुंबई के मनीभवन मे डॉ. आंबेडकर से उन्होने भेट कि, उनकी इस भेट मी हुआ परिसंवाद निम्नलिखित -



गांधीजी - ''मैने ऐसा सुना है आपकी मुझे लेके और कॉंग्रेस को लेकर कुछ शिकायते है | डॉ. आंबेडकर, कॉंग्रेस ने अछुतो के भलाई के लिये अभी तक २४ लाख रुपया खर्च किया है | ऐसा होणे के बावजुद भी आप मेरा और कॉंग्रेस का विरोध करते है , इस बात से मै आश्चर्यित हु !''

डॉ. आंबेडकर - ''श्रीमान गांधी, मै आज भी अपने मत पर अडीग हु | मेरा यह स्पष्ट मत है कि कॉंग्रेस ने अभी तक अछुतो के नाम पर जो भी किया है वह सिर्फ दिखावा है | मै आपसे पूछता हु, कॉंग्रेस का सभासद होणे के लिये जिस तरह से खाकी कपडे पहनना अनिवार्य करदिया गया है, क्या ठीक उसी तरह छुआ छुत का पालन ना करणा भी काँग्रेसी सभासदो के  लिये अनिवार्य क्यू नही किया गया ? नासिक के जिला कॉंग्रेस अध्यक्ष ने मंदिर प्रवेश के लिये विरोध करणे कि हिम्मत सिर्फ इसिलिये दिखाई थी क्योंकी उनपर छुआ छुत का पालन ना करणा बंधनकारक हि नही था | आपने उन्हे छुट दे रखी थी | आपका कॉंग्रेस अंग्रेजो का हृदय परिवर्तन देखणा चाहता है | अंग्रेजो का हृदय परिवर्तन देखणे से पहले कॉंग्रेस अछुतो के लिये पहले अपना हृदय परिवर्तन क्यो नही करती ? अब आप पर हमे बिलकुल भी यकीन नही | कॉंग्रेस पर भी नही | हम स्वयं हि स्वयं का उद्धार करेंगे अब, इसी बात पर अब हमे यकीन है , श्रीमान गांधीजी |"




गांधीजी - '' गोलमेज परिषद का आपके कर्तुत्व का वृतांत मुझे मिला, इससे मुझे पता चला आप एक परम देशभक्त है | '' 

डॉ. आंबेडकर - '' देशभक्त होणे के लिये पहले उस देशभक्त का देश होणा जरुरी है | मुझे जिस देश मी सार्वजनिक स्थल से पाणी नही पिणे दिया जाता मै उस देश को अपना देश कैसे कह सकता हु ? ऐसा होते हुये भी मै इस देश के हितो का नुकसान नही करते हुये अछुतो के हितो के कार्य मुझसे जितने भी बन पायेंगे वह मै करता रहूंगा | अछूत समाज ये मुस्लीम और सिख समाज से ज्यादा पीछडा हुआ है, ये बात सभी को पता है | पहिले गोलमेज परिषद मे मुस्लीमो  कि तरह अछुतो को भी स्वतंत्र प्रतिनिधित्व देणे का सभी ने मान्य किया है | मुसलमानो कि सभी मांग कॉंग्रेस मान्य करती है | कॉंग्रेस हमारी मांगो कि तरफ ध्यान भी देनेवाली है या नही ?


गांधीजी - '' हिन्दुओ से अछुतो को अलग प्रतिनिधित्व देनेवाली बात को मेरा विरोध है | अछूत हिंदू ही होणे के कारण इस तरह का प्रतिनिधित्व मान्य करणे से किसी का भी भला नही होनेवाला |''

डॉ. आंबेडकर - ''आपने अपना मत स्पष्टता से रखा, उसके लिये मै आपका आभारी हु | अब दोनो कि भूमिकाये क्या है एक दुसरे को पता चल चुकी है | अब मै यहा से प्रस्थान करता हु |"

   गांधी ने लंदन मे कहा था - '' अछुतो के उद्धार के लिये कॉंग्रेस शुरू से हि काम कर रही है | १९३० को कॉंग्रेस ने छुआ छुत निर्मुलन के कार्य अपना राजकीय आंदोलन के भाग के रूप स्वीकार किया है | कॉंग्रेस द्वारा किया गया ये कार्य बडा ही है | ''


    यहा एक बात तो स्पष्ट होती है, कॉंग्रेस और गांधी का अछुतोद्धार का कार्य ये मुख्यतः हिंदू समाज का हित ध्यान मे रखकर किया गया कार्य है | हिंदू समाज के हित को अछुतो के हितो से इनके द्वारा ज्यादा महत्व दिया गया था | उसमे कॉंग्रेस का भी नुकसान ना हो इस बात को भी पुरी तरह ध्यान मी रखा गया था | बाबासाहाब के नजर मे 'अछुतोद्धार' सबसे अहम मुद्दा और महत्वपूर्ण था | और यही आंबेडकर और गांधीजी इन दोनो मे सबसे बडा अंतर था | गांधीजी खुद अछुतो के एकमेव प्रतिनिधी होणे का दावा कर रहे थे तो डॉ. आंबेडकर यही अछुतो के सच्चे प्रतिनिधी थे | इसी संदर्भ मे डॉ. आंबेडकर ने एक महत्वपूर्ण किताब लिखी थी जिसका नाम था,'' गांधीजी और कॉंग्रेस ने अछुतो के लिये क्या किया ?''