शरीर कें भीतर किस कारण होता है माता का प्रवेश : ये है मुख्य वजह - HUMAN

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Friday, 15 June 2018

शरीर कें भीतर किस कारण होता है माता का प्रवेश : ये है मुख्य वजह

"माता" का भूत भारतीय समाज से क्यों नहीं जाता?

      अपने देश में अक्सर त्योहारों पर एक खास तरह का रंगारंग कार्यक्रम कुछ विशिष्ट लोगों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जो हर हाल में हर किसी को स्वीकारना ही होगा। क्योंकि वह कोई पूर्व नियोजित तमाशा नहीं होता। प्रश्न यह है कि उनके इस भयंकर किस्म के तमाशे को किस रूप में स्वीकारा जाए?


             विज्ञान पढ़ी इंसानी मन के बारे में समझ बनी तो गुत्थियाँ सुलझी। कुछ तथ्यों पर ध्यान दिया कि 1)  यह अधिकाँशतयः महिलाओं में होता है। विशेषकर वो महिलाएँ जो अपनी बहुत सी बातों व सोच को अपने भीतर ही दबाए रह जाती हैं। खूब बोलने वाली या मन की कर लेने वाली महिलाओं या पुरुषों को देवी या देवता पसंद नहीं करते। 2)  माता को वही खास परिस्थितियाँ चाहिए। दिया, अगरबत्ती, कपूर, धूप भजन ढोल आदि होने ही चाहिए। 3) यह सब कुछ हो लेकिन दर्शक दीर्घा खाली पड़ी हो तो बेचारी देवी या देवता का कोई काम नहीं। अकेले कमरे में आप सारी व्यवस्थाएं कर दें जहाँ किसी के आने की संभावना न हो, वहाँ ये देवी देवता नहीं आ सकते।


        असल में यह सब मनोवैज्ञानिक कारणों से होता है। असल में हमारा मस्तिष्क काम के तरीके के आधार पर दो हिस्सों में बंटा हुआ है। पहला वह जो सामान्यतः हम सीधे उपयोग में लाते हैं, इसे आप “Conscious Mind” भी कह सकते हैं और दूसरा वह जो वस्तुतः हमारे के नियंत्रण से परे है जिसे आप “Subconscious Mind” भी कहते हैं|





             मेरी समझ से Subconscious mind जिसे कह दिया उसकी प्रबलता इतनी होती है कि उसे तो Super Conscious कहा जाना अधिक सही होता। आखिर यह मन का वह हिस्सा है जो चौबीसों घंटे काम में लगा रहता है, किसी स्वचलित {Automated} मशीन की भांति, सोते जागते हर क्षण, यह आपकी बात नहीं सुनता, यह तो अपनी बात आपसे मनवाता है। उदाहरण के लिए आप बुद्धि से खुब समझते हैं कि मोबाइल का बहुत उपयोग ठीक नहीं, लेकिन फेसबुक पर जवाब देना वाट्सएप के मैसेज फॉरवर्ड करना नहीं चूक सकते। अलार्म 6 बजे का लगाया लेकिन आपका यही मन आपको उठने से रोके रखता है। हमारे इसी कारणवश अलार्म के साथ Snooze की सुविधा उपलब्ध करानी पड़ी। सभी त्वरित प्रतिक्रियाएँ भी इसी के हिस्से में आती हैं।


     नवरात्रि पर आने वाली माता कुछ और नहीं बल्कि यही 80% Subconscious Mind है जो पूरी प्रबलता से उस 10-12% सचेत मन पर हावी हो जाता है जो एक औसत मनुष्य इस्तेमाल करता है।

        ऐसी कोई भी घटना जैसे ईश्वर दिखना या माता आना आदि का संबंध इसी अवचेतन मन से है। यह हमारे चेतन मन द्वारा जीवन भर दी गई जानकारियों का बाह्य प्रक्षेपण कर देता है। जिसे अज्ञानता में लोग देवी या देवता का आना या दिखना मान लेते हैं।