संविधान निर्मिती समय की : मुख्य घटनाये ... - HUMAN

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Wednesday, 20 June 2018

संविधान निर्मिती समय की : मुख्य घटनाये ...

 



इन्सान कभी कभी हालातो के हाथो मजबूर होता है | उसको ना पसंद आनेवाली बात भी कभी कभी मजबुरी में करणी पडती है, काँग्रेस कें भी हालात उस वक्त कुछ ऐसे ही थे | कॉंग्रेस को रास ना आनेवाली बाते भी उसे मन मारके मजबुरी में करणी पडती |

    जिस मर्यादा तक लीग कें सामने झुकणा संभव था, उस मर्यादा तक कॉंग्रेस झुकी | लेकीन इतना झुककर भी लीग अपने ही अटलतट बातो पर कायम रहा | ऐसे में ही जब पाकिस्तान नामके नये देश के मुस्लीम लीग सपने देखणे लगा तब कॉंग्रेस से समझोता करने का सवाल ही नही था |

   जिस  ''मंत्रीमंडल मिशन'' योजना अंतर्गत संविधान सभा की योजना सूचित की गयी, वह मूलतः ही सदोष थी | लेकीन अंग्रेजो को इस देश से निकलने की जरुरत थी, इसीलिये कॉंग्रेस ने उस योजना का स्वीकार किया |


संविधान निर्मिती के संदर्भ में निम्न घटनाये घटीत हुयी -

   १. संविधान निर्मिती की प्रक्रिया पूर्ण होणे तक संविधान सभा की चार बैठक हुई | पहली बैठक ९ दिसंबर १९४६ से लेकर ३१ जुलाई १९४७ तक चली |

२. सरदार वल्लभभाई पटेल इनके तारीख २४ जनवरी १९४७ के प्रस्तावअनुसार संविधान सल्लागार समिती गठीत की गयी | इस प्रस्ताव अनुसार चार उपसमिती गठीत की गयी |

३. संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद इन्होने मुंबई प्रांत के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी. जी. खेर इन्हे खत लीख डॉ. आंबेडकर को संविधान सभा पर त्वरित नियुक्त कर भेजा जाये इस संबंध में खत लिखा |

४. पंडित जवाहरलाल नेहरू इन्होने १५ अगस्त १९४७ अपने मंत्रिमंडल का गठन किया | इस मंत्रिमंडल में शामिल होणे हेतू पंडित नेहरूने डॉ. आम्बेडकर को प्रस्ताव दिया | उस प्रस्ताव का स्वीकार डॉ. आंबेडकर ने किया | वह स्वतंत्र भारत के पहले कायदेमंत्री बने | 





५. संविधान सभा का दुसरा सत्र १४ अगस्त १९४७ से २५ फरवरी १९४८ तक चला |

६. २४ अगस्त १९४७ को संविधान आराखडा समिती निर्माण की गयी | इस समिती के सदस्य थे  - अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, एन. गोपालस्वामी अय्यंमार, बी. आर. आंबेडकर, के एम मुंशी, सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला, बी. एल. मित्तर और डी. बी. खेतान, एन. माधवराव और टी. वी. कृष्णामाचारी |


८. संविधान परिषद की अंतीम बैठक २६ नवंबर १९४९ इस दिन सुबह १० बजे शुरू हुई  और इसी दिन भारत का संविधान सर्वानुमत से स्वीकृत किया गया |

        २९ एप्रिल १९४६ इस दिन सरदार पटेल इन्होने छुआ छुत का पालन कानूनन जुर्म ठहराणे वाला बिल प्रस्तुत किया था  | इस अनुसार छुआ छुत का पालन दंडनिय अपराध ठहराया गया | लेकीन अजीब बात यह है की छुआ छुत का पालन करणे वाले अभी भी मुक्त है |