सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोदी सरकार को फटकार : इन कठोर शब्दो में लगायी लताड - HUMAN

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Wednesday, 11 July 2018

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोदी सरकार को फटकार : इन कठोर शब्दो में लगायी लताड





        सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट महेश चंद्र मेहता द्वारा १९८५ को दिल्ली और एनसीआर  में बढ रहे प्रदूषण के मामले में दायर की गयी जनहित याचिका पर सुनवाई की है | इस मामले पर सुनवाई करते दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कठोर शब्द इस्तेमाल करते हुये पेट्रोलियम मंत्रालय को, जस्टीस मदन बी. लोकूर और जस्टीस दीपक गुप्ता की दो सदस्यीय पीठ ने कठोर रुख अपनाते हुये पुछा, " क्या मंत्रालय खुद को भगवान समझता है या खुद को भारत सरकार से भी उपर मानता है | क्या उन्हे लगता है खाली बैठे जज उनकी दया पर है ? "

   वर्तमान सरकार मोदी सरकार के समय में अपनी मनमानी कर रहा है, अपनी इच्छा नुसार ये  मंत्रालय चल रहा है | इस सरकार के तानाशाही का सबसे बडा उदाहरण मतलब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन ना करणा |



सुप्रीम कोर्ट का पेट्रोलियम मंत्रालय पर सख्त रुख 


सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के उपर ओद्योगिक इकाईयो में पेटकोक के इस्तेमाल से संबधित मामले में अपनी नाराजगी जाहीर की है |
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था की मोदी सरकार में समाविष्ठ  वर्तमान मंत्रालय ने रविवार को ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को कोक के आयात पर प्रतिबंध लगाणे के मुद्दे से अवगत कराया है | 





२५ हजार रुपये का जुर्माना 


सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के मुद्दे पर कडा रुख अपनाते हुये पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पर इस लापरवाही के लिये २५ हजार रुपये का जुर्माना लगाया और साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है | क्योंकी दिल्ली सरकार द्वारा  राजधानी में अनेक रास्तो पर यातायात अवरुद्ध होणे के लिये किसी प्रकार की उपायात्मक समयबद्ध स्थिती रिपोर्ट पेश नही की| कोर्ट का यह भी कहना है दिल्ली सरकार आदेशो के प्रती ज्यादा गंभीर नही दिखाई देती | जबकी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या जोरो पर है | इस मामले से संबधित आगे की सुनवाई १६ जुलाई को होनी है |