माॅडलिंग की दुनिया में रैम्प पर उभरा : जशपुर की रेने कुजूर का नया नाम - HUMAN

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Monday, 16 July 2018

माॅडलिंग की दुनिया में रैम्प पर उभरा : जशपुर की रेने कुजूर का नया नाम



जशपुर के एक छोटेसे गाव बगीचा से निकलकर देश और विदेश तक मॉडलिंग की दुनिया में तहलका मचा देणे वाली रेने कुजूर जिसे रेहाना का हमशक्ल भी कहा जा रहा है, मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने के बाद इन दिनो सोशल मिडिया से लेकर महानगरो के अखबारो में सुर्खियो में है |


जीवन संघर्ष 


    जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के पिरई गांव की रहनेवाली मॉडल रेने उर्फ रेने कुजूर ने बेहद कम समय में मॉडलिंग की दुनिया में एक नया मुकाम हासील कर लिया है | रेने दिल्ली में रहती है और उसके माता पिता पिरई गांव में ही रहते है जहा उनकी किराने की दुकान है जिसका नाम उन्होने दिल्ली दुकान  रखा है और साथ ही खेती कर वे अपना जीवन यापन कर रहे है | रेने के पिता फिदीलीयुस कुजूर दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्रालय में कार्यालय अधीक्षक कें पद पर कार्यरत रहे है | सेवानिवृत्ती होणे के पहले उन्हे दिल की बिमारी और कैंसर जैसी घातक बिमारी हो गयी जिसके कारण ६ साल पहले दिल्ली छोडकर वे गांव आ गये और यही बस गये है |

  रेने के संघर्ष की कहाणी बया करते हुये उनकी मा का कहना है की पिता की तबियत खराब होणे के बाद वह बेटी को नही पढा पाये जिसके बाद रेने ने खुद ही अपनी पढाई मेहनत और परिश्रम से जारी रखी और मॉडलिंग की दुनिया में मेहनत कर मुकाम पर पहुच गयी | वह स्कूल में फैन्सी ड्रेस कॉम्पिटीशन में भाग लेती थी और उसे बचपन से ही मॉडलिंग का शौक था | वह हमेशा कहती थी की वह मॉडल ही बनेगी | उसके सावले रंग को लेकर उसकी मा हमेशा कहा करती थी की गोरे लोगो की दुनिया मॉडलिंग की है पर वह तो काली थी | लेकीन उसे भरोसा था की मेहनत और संघर्ष से उसे उसका मुकाम जरूर मिलेगा |




साथीयो ने चिढाया तो मिला मुकाम 

रेने कुजूर जब प्राथमिक कक्षा में थी उस दौरान स्कूल में होनेवाले वार्षिकोत्सव में उसने फैन्सी ड्रेस में हिस्सा लिया था | फैन्सी ड्रेस में वह परी बनकर स्टेज पर उतरी  थी | उसके स्टेज पर उतरते ही उसके साथी मंच कें नीचे से चिल्लाने लगे देखो देखो काली परी है | बस उसी दिन से रेने ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने की ठाण ली और उसने अपने जिद से अपने मुकाम को हासील कर लिया और अपने काले रंग के वजह से ही मॉडलिंग  की दुनिया में इंटरनेशनल फेम बन चुकी है | 

रेने कहती है...

"लोग एक अनुसूचित जनजाती के लडकी को  आगे नही बंढने देते है, वे सोचते है they can't do anything and हम एक गवर्नमेंट जॉब के उपर ज्यादा कुछ नही सोच सकते है life में ऐसे भी देखा, लेकीन मैने इस मानसिकता को बदला है मैने साबित किया कि वो चाहे तो सबकुछ कर सकते  है | मेरे नाक का भी बहुत मजाक उडाया गया, चपटी नाक, चपटी नाक कह्के बुलाया गया | मुझसे ये भी कहा गया था की आप किसीसे बोलना नही की आप छत्तीसगड से हो| स्टॅन्डर्ड मेंटेन रखना होगा दिल्ली से हु ये बताना और इस शर्त पर  मुझे सिलेक्ट किया | काले रंग के वजह काफी मुश्किलो का सामना करणा पडा लेकीन सारी मुश्किलो का सामना कर मैने अपना मुकाम हासील किया | मैने कर दिखाया | "



हमे गर्व है जशपुर की आदिवासी बेटी रेणु उर्फ रेने कुजूर उर्फ रेहाना पर....रेने की हिम्मत,दृढ़ संकल्प, उनकी इच्छा शक्ति और नारी शक्ति को नमन व उनके माता-पिता को बारंबार प्रणाम 👏👏