आज होनेवाला है इस सदी का सबसे बडा ग्रहण : जाणिये वैज्ञानिक कारण, और क्या है इससे जुडी समाज में गलत धारणाये - HUMAN

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Friday, 27 July 2018

आज होनेवाला है इस सदी का सबसे बडा ग्रहण : जाणिये वैज्ञानिक कारण, और क्या है इससे जुडी समाज में गलत धारणाये




     तारीख 27 जुलाई 2018 शुक्रवार को रात 11 बजकर 54 मिनट बाद शुरू होनेवाला खग्रास चंद्रग्रहण सुबह 3 बजकर 49 मिनट तक रहेगा । इस और हमेशा होंनेवाले ग्रहण को लेकर अन्धविश्वास, गैरसमज, डर जनसामान्य के मन में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और बाकि माध्यमो द्वारा जैसे फैलाई जाती हैं उसी तरह इस बार भी फैलाई जा रही है।पारंपरिक मान्यताएं भी इस बात को मानने के लिए बढ़ावा देती हैं। जरूर इस बात को अपने अवैज्ञानिक, अतार्किक संस्कारो की वजह से बढ़ावा मिलता हैं। ऐसा होता होगा क्या असल में ?

परख लेते हैं एक बार...



चंद्रग्रहण यह सूरज - धरती - चांद ये तीनो एक सीधे लाइन में आने के बाद होता  हैं। ये हमने स्कूल में पढ़ा होगा। धरती के छाव में पूरी तरह चांद के आने पर खग्रास चंद्रग्रहण तो उसका कुछ हिस्सा आनेपर खंडग्रास चंद्रग्रहन होता हैं।लेकिन चंद्रग्रहन होने पर चांद की तरफ ना देखना.. क्योंकि अशुभ किरण , घातक किरण उससे निकलते हैं ऐसा माना जाता हैं। कुछ पदार्थो में तुलसी के पत्ते डाल उन्हें खुद ही शुध्द हुआ समझा जाता है, तो पानी अशुद्ध मान कर फेंक दिया जाता हैं। समाज हमेशा अज्ञान में, अन्धविश्वास में मुहूर्त और ग्रह तारो के डर में रहकर उसको मन चाहे उतना आर्थिक रूप से छला जाये यही चाल उसके पीछे हैं। किसी भी प्रकार के घातक किरण चंद्रग्रहन के वक्त धरती पर नही गिरते, इस बात को खगोलशास्त्रज्ञ कर्ताओ ने अनेक बार प्रमाणित कीया  है।ग्रहण का काल अशुभ भी नही होता हैं।

सच में क्या ऐसी किरणे गिरती है?


     आप ही परखो। पृथ्वी का उपग्रह चांद यह स्वयं प्रकाशित नही।सूरज मालिका का कोई भी ग्रह स्वयंप्रकाशीत नही।उनपर सूरज  की रोशनी गिरती है और वह पृथ्वी पर परावर्तित होकर हमतक पहुचता हैं।इसका मतलब उनकी तरफ से कोई भी किरणे हमतक नही पहुचती हैं।इसके विपरीत इस काल चांद पृथ्वी के छाव में रहता है। उस वजह से उससे कोई प्रकाश किरण निकलना भी संभव नहीं है। जो भी प्रकाश होता है वह सूरज का ही होता है।

       ग्रहण काल में चांद लाल रंग का दीखता हैं।उसका वैज्ञानिक कारण यह है कि, पृथ्वी वातावरण से व्याप्त है। उसके वातावरण से सूरज के प्रकाशकीरण अपवर्तित होकर चांदपर गिरते हैं।लाल रंग के किरण बड़ी तौर पर अपवर्तित होकर चांद पर गिरते हैं। उसवजह से चाँद लाल दीखता हैं। खग्रास चांद ग्रहण में चांद कैसे दिखेगा ये बहुत सी बार पृथ्वी के वातावरण पर निर्भर करता है। 19 मार्च 1848 को हुए खग्रास चंद्रग्रहन में चांद इतना प्रकाशीत था कि, लोग चांद को ग्रहण लगा ये मानने को तैयार ही नहीं थे। तो 18 में 1761  और 10 जून 1816 को हुए खग्रास चंद्रग्रहण में चांद पूरी तरह से छुप गया था। ये पृथ्वी के छाँव के कारण होता है। राहु केतु की वजह से नही।इस नाम से कोई भी ग्रह नही ये भी हमने समझना होगा। उसमे भी पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी, चतुर्थी-सप्तमी-अष्टमी(उदा.)ये भी कोई खास दिन नही है तो चाँद की कलाओ से अपने खगोलशास्त्रज्ञ, चिकित्सक पूर्वजों द्वारा उस वक्त तैयार की गई कालगणना की खगोलीय निरिक्षण नोंद करने की पद्धत्ति हैं।

      कर्मकांड, उपवास,व्रत करने के लिए निश्चित किये गये दिन नही।यह भी इस निमित्त से ध्यान में रखा जाए। ग्रहण काल में हमने खाना खाया उसका किसी भी तरह का विपरीत परिणाम हमपर नही हुआ। यह ब्रम्हांड में होनेवाली खगोलीय घटना हैं। तो चलिए,इस शताब्दी का सबसे बड़ा खग्रास चंद्रग्रहण देखो, खगोलीय घटना का निरीक्षण कर लुप्त उठाओ। मानसिक गुलामगिरी की बेड़िया तोड़ो और औरो को भी यह जानकारी देकर प्रेरित करों|






 ग्रहण के बारे में अंधविश्वास:


❌१)ग्रहण काल में कोई भी नया कार्य करना अशुभ माना जाता हैं।
✅कोई कार्य करते वक्त ग्रहण के कारण रुकावट नही आती।

❌२)ग्रहण के दौरान भोजन बनाना और खाना वर्जित होता है।
✅खाना बनाके खा सकते हैं।

❌३)मलमूत्र विसर्जन करना अशुभ माना जाता हैं।
✅करने पर किसी भी प्रकार की हानि नही होती।

❌४)देवी देवताओं की मूर्ती या तुलसी को छूना अशुभ
✅छूने पर कुछ भी अशुभ नही होता

❌५)दांतो को साफ नही करना या बालों में कंघी नही घुमाना
✅करने पर किसी भी प्रकार की हाणी नही होती।

❌६)गर्भवती औरत ने ग्रहण नही देखना चाहिए, गर्भ को हानि पहुच सकती हैं
✅झूठ, गर्भ को कुछ नही होता

❌७)ग्रहण काल के  दौरान दूषित हुआ अनाज, पानी फेक देना चाहिए
✅ग्रहण काल में पानी अगर प्रदूषित होता होगा तो नदी, तालाब का पानी भी दूषित होता होगा?फिर वो पानी कहा फेकेंगे?ग्रहण से अनाज, पानी दूषित नही होता हैं।

❌८)ग्रहण सम्पति के बाद घर के शुद्धिकरण हेतु गंगाजल छिड़के
✅जरूरी नहीं है