कोरेंगाव - भीमा हिंसा प्रकरण : गांधीवादी, अम्बेडकरवादी, मार्क्सवादी विचारधारा के लोगो की गिरफ्तारी - HUMAN

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Wednesday, 29 August 2018

कोरेंगाव - भीमा हिंसा प्रकरण : गांधीवादी, अम्बेडकरवादी, मार्क्सवादी विचारधारा के लोगो की गिरफ्तारी


           

             पुलिस ने इन लोगों को अर्बन नक्सली के नाम पर गिरफ्तार किया है। ये तमाम शख्सियतें गांधीवादी, अम्बेडकरवादी, मार्क्सवादी विचारधारा के लोग है जिन्हें अब प्रचारित किया जा रहा है माओवादी, नक्सलवादी, आतंकवादी है। इन्होंने अपने लेखनी एवं विचारों समतामूलक समाज के लिए आवाज उठाई। किसानों, शहीदों, गरीबों, आदिवासियों और पीड़ितों के हित में अपनी कलम का इस्तेमाल किया। सरकार ने इन्हें आतंकवादी घोषित करके अघोषित आपातकाल लगा दिया।


           भीमा कोरेगांव जिसमे कई उग्र संगठनों के नाम सामने आये थे उनको सजा दिलाने के लिए ऐसी शख्सियतें खुलकर सामने आई थी। आज उन संगठन और नेताओं को जेल में ठूंसने की बजाय देश के एक्टिविस्टों को देश के प्रधानमंत्री और बीजेपी नेताओं की हत्या की साजिश रचने के जुर्म में गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। जिन्हें जेल में होना चाहिए वे अपने काम को अंजाम देने में लगे हैं और जिन्हें सम्मान मिलना चाहिए उनकी आवाज रौंदी जा रही है।








इस संदर्भ में  -

सीताराम येचुरी ,

माकप महासचिव का कहना है...   
       
      जीन दलित कार्यकर्ताओ  ने सरकार का विरोध किया है , उनके खिलाफ जान बुझकर यह कारवाई की जा रही है| यह लोकतांत्रिक अधिकारो पर सीधा हमला है | आज की स्थिती १९७४ के आपातकाल से भी भयावह है क्योंकी मानवाधिकार   कार्यकर्ता भी नही छोडे जा रहे है|


अरुंधती रॉय, 

सामाजिक कार्यकर्ता कहती है...

   ये खतरनाक संकेत है इससे साबित होता है की सरकार अपना जनादेश खो रही है और आतंक का सहारा ले रही है | वकील , कवियो, लेखको, दलीतो के लिये लडणे वालो और बुद्धीजीवियो  को सरकार बेतुके आरोपो में गिरफ्तार कर रही है| 

पीएल  पुनिया ,

कॉंग्रेस प्रवक्ता ...

  पुलिस ने बिना सबूत के मानवाधिकार कार्यकर्ताओ को गिरफ्तार किया है | कोरेगाव - भीमा मामले में यह साबित नही हो सका है की प्रधानमंत्री की हत्या के साजीश में वे लोग शामिल थे |


हमारा देश गृहयुद्ध और तानाशाही के बहुत करीब है। 2022 के आसपास तक यदि यही हालात रहे तो इस देश के अंदर ही जबरदस्त गृह युद्ध छिड़ेगा और विदेशी ताकतें फिर इस देश के हुक्मरान बनेंगे। भारत की नींव को खोखली करने में मौजूदा सरकार और उसके द्वारा पोषित संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बाकि का काम सोशल मीडिया और आईटीसेल कर रही है। इस मामले के मुख्य दोषी जिनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले थे गौरतलब है की उनपर किसी भी प्रकार की कोई कारवाई नही की जा रही है | सरकार की नियति को अभी आगे देखना और दिलचस्प है।