धार्मिक पाखंड को उजागर करती : सुप्रसिद्ध अभिनेत्री मीना कुमारी के जीवन की ये सच्चाई, जो सोचने को विवश कर देगी - HUMAN

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Friday, 3 August 2018

धार्मिक पाखंड को उजागर करती : सुप्रसिद्ध अभिनेत्री मीना कुमारी के जीवन की ये सच्चाई, जो सोचने को विवश कर देगी




समाज में स्थापित धार्मिक बंदिशो से बच पाना भी सबके लिये संभव नही होता | ना मानणे पर उस समाज कें ठेकेदार ना जाणे कीस कीस तरह इल्जाम लगाकर समाज से दूर कर देते है|

ये घटीत सत्य घटना है | फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी को उनके शौहर कमाल अमरोही ने गुस्से में आकर "तीन तलाक" दे दिया था | बाद में फिर पछ्तावा होणे पर उन्होने फिर मीना कुमारी से निकाह करणा चाहा | लेकीन तब इस्लामी धर्म गुरुओ द्वारा बताया गया, की इसके लिये पहले मीना कुमारी को " हलाला " करणा पडेगा | तब कमाल अमरोही ने मीना कुमारी का निकाह अपने दोस्त अमान उल्ला खान (जीनत अमान के पिता ) से करवाया | मीना कुमारी को अपने नये शौहर के साथ हमबिस्तर होणा पडा | फ़िर इद्दत यानी मासिक आणे के आणे के बाद उन्होने अपने नये शौहर से तीन तलाक लेकर अपने पुराने शौहर कमाल अमरोही से दुबारा निकाह किया | मीना कुमारी ने लिखा था की -'' जब मुझे धर्म के नाम पर , अपने जिस्म को, दुसरे मर्द को सौपना पडा, तो फिर मुझमे और वेश्या में क्या फर्क रहा?"


..चाहे कोई भी धर्म हो पुरुषों ने अपने आय्याशियाँ करने के तरह तरह के तरीक़े और कानून बना रखे हैं
सोचो कभी कोई स्त्री कानून क्यों नहीं बना पाती
पहले उनको शिक्षा से वंचित रखा जाना क्योंकि वह बात को समझ ही न पाये जिससे उसका आसानी से शोषण किया जाय और उनको पता भी न चले ।की उनको उल्लू बनाया जा रहा है इसलिए स्त्री जाति का  उद्धार सिर्फ शिक्षा से ही हो सकता उनमें सोचने समक्षने की ताकत आ सकती है । वह खुद कानून में बदलाव ला सकती है ।
अपने ही पति से दोबारा शादी करने के लिए भला हलाला की क्या जरूरत सोंचों.......
ये सब धर्म के ठेकेदार हैं यकीन किजिए......





कोई अल्लाह कोई भगवान कोई परमात्मा किसी का शोषण करना नहीं सिखाता ये सब डर का खेल है । सोचो कभी पहले बहुत सारे विवाह की प्रथा थी कहते है सहारा दिया एक भी लडकी को बहन बना कर उसका कन्यादान कर देते इतना बडा दिल है तो । किसी औरत को वेश्यावृत्ति में न ढकेलते इतने बडे वीर हो तो ।किसी को मुहब्बत का झाँसा देकर इस्तेमाल न करते इतने बडे मर्द हो तो.....एक रात बिता कर छोडी गयी कभी....कभी बीबी की लाइन लगा दी....सब अपनी सुविधानुसार


       इसमे औरत का भी दोष है, एक औरत गलत निति के खिलाफत नहीं करती । रही बात हलाला की तो हलाला करने वाले काजी की बीबी उसके खिलाफत कर सकती है । सोचो दुनिया भर में जितने पीर पैगम्बर हुये है जितने भगवान , महात्मा पैदा हुये है सब औरत नौ महीने कोख में रख कर जन्म दी ....उनकी मल मूत्र साफ किया दूध पिलाया पैरों पर चलना सिखाया । उसे क्या धर्म के नाम पर परमात्मा का खौफ दिखाते हो । शोषण करने के ये  सब तरीक़े हैं और कुछ नहीं जब तक औरत पढ लिख कर जाग्रत नहीं होगी गलत चीजों की खिलाफत नहीं करेगी । तब तक ये सब चलता रहेगा । जब सालों पहले का टीवी बदल दिया ।टेलीफोन की जगह मोबाइल आ गया । जाने क्या क्या बदलाव आ गये जो बेजान थे....

     और जिसमें रुह है धडकन है जीवन है वह पूजनीय स्त्री पुरूषों की भी जननी है । उस स्त्री जाति के मानसिक शारिरिक शोषण को रोकने के लिए नये कानून बन जायेंगे तो ऊपर वाला नराज हो जायेगा..... इतनी मूर्खतापूर्ण बातो पर तो सिर्फ अफसोस होता है....और हँसी आती है ।...........