स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपती : पी गये थे २०० ब्राम्हणो के पैर धोकर पाणी - HUMAN

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Tuesday, 4 September 2018

स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपती : पी गये थे २०० ब्राम्हणो के पैर धोकर पाणी

चरणामृत!


1950 में जब देश में संविधान लागू हुआ और डॉ राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति हुए तब  काशी गये। चूँकि डॉ राजेंद्र प्रसाद हिन्दू धर्म भीरु थे मगर जाति से कायस्थ थे जिस वर्ग में स्वामी विवेकानन्द भी आते हैं। हिन्दू वर्णानुसार कायस्थ शुद्र वर्ग है और डॉ राजेंद्र प्रसाद को लोकतंत्र ने एक बड़े पद पर विराजमान अवश्य किया था मगर सामाजिक उच्चीकरण के लिए वे काशी के ब्राह्मणों की शरण में चले गए।


बनारस में उन्हें 200 ब्राह्मणों ने दीक्षित किया और राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन 200 ब्राह्मणों के पैर धोए। पैर धोकर एक पात्र में चरणामृत एकत्रित किया और महामहिम उसे पी गये। यह सब देखकर पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर डॉ अम्बेडकर तक सबने तीखी प्रतिक्रिया दी। जबकि डॉ राम मनोहर लोहिया जी ने तो 'जाति और योनि के दो कटघरे '  शीर्षक लेख में इसकी तीव्र निंदा करते हुए लिखा था ---

" इस आधार पर कि कोई ब्राह्मण है ,किसी के पैर धोने का मतलब होता है जातिप्रथा, गरीबी और दुखदर्द को बनाये रखने की गारंटी करना। इससे नेपाल बाबा और गंगाजली की सौगंध दिलाकर  वोट लेना सब एक जंजीर है। उस देश में जिसका राष्ट्रपति ब्राह्मणों के पैर धोता है, एक भयंकर उदासी छा जाती है, क्योंकि वहां कोई नवीनता नही होती ; पुजारिन और मोची ,अध्यापक और धोबिन के बीच खुलकर बातचीत नही हो पाती। जिसके हाथ सार्वजानिक रूप से ब्राह्मणों के पैर धो सकते हैं, उसके पैर शूद्र और हरिजन को ठोकर भी तो मार सकते हैं।"





इतना ही नही डॉ लोहिया की किताब the caste system में उन्होंने लिखा है कि  “भारतीय लोग इस पृथ्वी के सब से अधिक उदास लोग हैं। भारत गणराज्य के राष्ट्रपति ने बनारस शहर में शरेआम दो सौ ब्राह्मणों के चरण धोये। सरेआम दुसरे  के चरण धोना भोंडापन है, इसे केवल ब्राह्मणों तक ही सीमित रखना एक दंडनीय अपराध होना चाहिए। इस विशेषाधिकार प्राप्त जाति में केवल ब्राह्मणों को बिना विद्वता और चरित्र का भेदभाव किये शामिल करना पूरी तरह से विवेकहीनता है और यह जाति व्यवस्था और पागलपन का पोषक है। राष्ट्रपति का ऐसे भद्दे प्रदर्शन में शामिल होना मेरे जैसे लोगों के लिए निर्मम अभ्यारोपण है जो केवल दांत पीसने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते.”

 source : ( The Caste System- Lohia, page 1 & 2)