क्यो किया था इस बौद्ध भिक्षु ने खुद को आग के हवाले : जाणिये दिल दहला देणे वाला ये किस्सा - HUMAN

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Friday, 26 October 2018

क्यो किया था इस बौद्ध भिक्षु ने खुद को आग के हवाले : जाणिये दिल दहला देणे वाला ये किस्सा

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१९६३ थिच क्वांग डक आग में जलते हुये



उपरी फोटो दुनिया के गिनेचुने प्रसिध्द फोटो में से एक है | सन १९६३ में जून महिने में वियतनाम के सायगाव शहर में एक महायानी बौद्ध भिक्षु ने(थिच क्वांग डक) ने अग्नी में जलकर प्राण त्याग दिये | 

घटनाक्रम

       वियतनाम में उस वक्त तकरीबन 70% की तादाद में बौद्धधर्मिय अनुयायी निवासित थे।लेकिन वियतनाम सरकार की प्राथमिकता कैथोलिक चर्च और ईसाईयो को ज्यादा थी। इसके चलते वहा के बौद्धधर्मियो का उत्पीड़न अपने चरम सीमा पर था। सरकार के इस रवैये के खिलाफ प्रताड़ित बौद्ध लोग जगह जगह सरकार के इस पक्षतापूर्ण रवैये का विरोध करने लगे।

      लोगो का क्रोध तब अधिक अनावर हुवा जब सरकार की तरफ से फर्मान जारी किया गया कि, बौद्धिस्ट झंडों को फहराना गैरकानूनी है। कुछ दिन पश्चात बुद्धजयंती का अवसर आया।इस दिन सरकार के इस नियम का विरोध करते हुए भारी संख्या में लोगो ने ध्वज फहराये और झंडों को लेकर Government Broadcasting Station की और चल पड़े। पुलिस इन प्रदर्शन करनेवालों पर गोलीबार किया जिसमें 9 लोग मारे गए।

इस घटना से लोगो के मन का आक्रोश अधिक बढ़ गया। सरकार का इन बौद्ध बांधवो के प्रती अमानवीय व्यवहार का विरोध करते हुए संत थिच क्वांग डक ने अग्नीदहन करते हुए खुद के प्राण त्याग दिए।

इंसानियत का संदेश

वे यह संदेश दुनिया के लोगो को देना चाहते थे कि, किसी भी प्रकार के अन्याय के विरूद्ध लड़ने के लिए क़ुरबानी देनी ही पड़ती हैं। न्याय तभी मिलता है, क्योंकि दुनिया जालिमो से भरी है। उनके अंदर का इंसान तभी जागता है जब ऐसा कुछ उग्र वे देखते हैं। इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से खुद को अग्नि में भस्म किया।



 ऐसा कुछ हुवा था उस दिन

11 जून 1963 के एक दिन पहले याने 10 जून को पत्रकारों को सुचना मिली थी कुछ घटना घटित होने वाली है ,लेकिन पत्रकारों ने उसपर उतना ध्यान नहीं दिया। बहुत से पत्रकारों ने यह सोचा होगा की ऐसे माहौल में अलग क्या होगा! अगले दिन घटनाक्रम के स्थल पर मौजूद पत्रकारों के साथ वहा  एक फोटोग्राफर भी मौजूद थे जिनका नाम मैल्कम ब्राउन था।

11 जून को समीपवर्ती बौद्ध पैगोडा के तकरीबन 340 बौद्ध भिक्षुक लोग और संत का एक दल सरकार के इन नीतियों का विरोध करने वहा पहुचा। ये भिक्षु सरकार के इन नीतियों के खिलाफ नारे लगा रहे थे। जब यह समूह कम्बोडियन एम्बेसी के सामने पहुचा तो वहा एक नीले रंग की कार सामने आकर रुकी।

बैठने की मुद्रा


कार से थिच क्वांग डक और दो संत उनके साथ उतरे। एक संत ने नीचे जमीन पर एक कुशन रखा। उस कुशन पर पद्मासन मुद्रा में संत थिच क्वांग बैठे। दूसरे संत ने कार की डिक्की में रखा गैलन निकाला जिसमे 5 लीटर पेट्रोल था । पेट्रोल संत थिच क्वांग डक पर डाला। संत थिच क्वांग डक माला लिए जाप कर रहे थे। इसी बीच माचिस जला कर खुदपर डाल दी।

उनके वस्त्र और शरीर धू - धू की आवाज में जलने लगे काला धुंआ उठने लगा। जलते वक्त थिच क्वांग डक न तो जरा भी हिले और नही कोई आवाज की| अंग्रेजी और वियतनामी जुबान में उन में से एक बौद्ध संत ने लाउड स्पीकर पर घोषणा दी- "एक बौद्ध संत खुद जलकर प्राण त्याग रहा है"। बौद्ध भिक्षु शहीद बन गया। 10 मिनट में बौद्ध भिक्षु का शरीर पूर्ण जलने पर पीठ के बल गिरा। आग बुझने पश्चात उन्हें पीले वस्त्रों में लपेटकर समीप पैगोडा ले गए।

मरने से पूर्व थिच क्वांग डक के अंतिम शब्द थे-"इससे पहले मेरी आँखे बंद हो और बुद्ध को अर्पण हु, मैं सविनय भाव से राष्ट्रपति Ngo Dinh Diem से अनुरोध करता हु कि वे अपने देश के लोगो के प्रति करुणाभाव दिखाते हुए देश को सशक्त बनाने के लिए धार्मिक समानता बरते। मेरी संघ के सन्मानित श्रद्धेय सदस्यों से अपील हैं,की सभी बौद्धिस्ट एकजुट होकर बौद्ध धर्म की अखंडता के लिए संघर्ष करें।

इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य


बौद्ध भिक्षु के शरीर का दुबारा अंतिम संस्कार किया गया। दो बार जलाने के बावजूद भी उनका हृदय नही जला। इसको देखते हुए उनके हृदय को xa loi पैगोडा में सुरक्षित रख दिया गया है। पूरी दुनिया में इस दृश्य ने तहलका मचा दिया। यह घटना वियतनाम के सरकार के पतन का कारण बनी और वहा के बौद्धिस्ट लोगो के शोषण का अंत हुआ।

यह फोटो पूर्ण विश्व के इतिहास में अधिक प्रसिद्ध फोटो में से एक है। फोटो खींचने वाले फोटोग्राफर मैल्कम ब्राउन को इस फोटो के लिए फोटोग्राफी का पुलित्जर पुरस्कार मिला।