ऐसा एक विलक्षण,अलौकिक काम कर दिखाया इस छोटेसे गाव के बौद्धो ने - HUMAN

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Tuesday, 30 October 2018

ऐसा एक विलक्षण,अलौकिक काम कर दिखाया इस छोटेसे गाव के बौद्धो ने

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अगर मन में जिद और इरादे मजबूत हो तो इंसान बडे बडे काम कर जाता है, मुश्किले दूर होती जाती है और राह आसान बनती जाती है...

ऐसा ही एक अतुलनीय, विलक्षण काम कर दिखाया एक छोटेसे गाव के बौद्धो ने ...!

गाव का नाम है, ''रेऊलगाव''... ज्यादा से ज्यादा ८०-१०० घर होंगे | ये गाव वसमत तालुका, जिला हिंगोली यहा स्थित है | यहा के लोगो ने खुद के मेहनत से एक अप्रतिम विहार का निर्माण किया | विशेष बात ये है कि गाव के लोगो ने इस विहार का निर्माण खुद के खुद के खर्चे से किया | बहुत से राजनैतिक लोगो ने धनराशी देणे कि कोशिश कि लेकीन गाव के लोगो ने लेणे से इन्कार किया |

खुद ही कि जी तोड मेहनत 


इस विहार के लिये लोगो ने खुद मेहनत की | जब विहार की निव बन रही थी तब हर घर के सभी सदस्य आते | छोटे से लेके बडो तक एभी आते | रात बारा बजने तक काम करते | समय का ध्यान भी उन्हे नही रहता | सलाम उनके कोशिश को |

विहार की खासियत 


इस विहार का निर्माण बोधगया जैसा करणे की कोशिश की गयी है | विशेषता इस विहार यह है कि इसे पंचरंग ध्वज का रंग दिया गया है | साथ ही बडे शिखर की उचाई ८० फुट है और दो छोटे शिखर की उचाई ५० फुट है |


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दोस्तो ये भारतवर्ष की मिट्टी यहा की इट से इट इस बात कि गवाह है की ये धरती बुद्ध की है | बुद्ध के विचार मनुवादी सोच को खतरा थे | इसीलिये उनके द्वारा बुद्ध के विचारो को पुरी तरह मिटाने की कोशिश कि गयी और वे अपने इस कार्य में सफल भी हुये | अगर बाबासाहाब डॉ. आंबेडकर जी पुरी तरह से जिस धम्म को यहा के लोगो भुला दिया था,उस धम्म कि १४ अक्तूबर १९५६ को दीक्षा देकर इस मिट्टी में धम्म के बीज दुबारा बोने का काम किया | बाबासाहाब के इस सपने रेऊलगाव वासियो ने आगे बढाने का काम किया है | उनके जैसे भीम अनुयायीयो को और उनके इस जज्बे को दिल से सलाम 

जय भीम ....