स्टॅच्यू ऑफ युनिटी : जाणिये सरदार पटेल और आरएसएस, बीजेपी से जुडे कुछ तथ्य - HUMAN

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Wednesday, 31 October 2018

स्टॅच्यू ऑफ युनिटी : जाणिये सरदार पटेल और आरएसएस, बीजेपी से जुडे कुछ तथ्य


उपर पोस्ट कार्टून के बारे क्या आपको पता है?


यह 1945 में अग्रणी पत्रिका जिसका मुख्य सम्पादक सावरकर था उसमें यह कार्टून छापा गया था। इसमें सावरकर जिसको आरएसएस वाले पूजते हैं और साथ मे बीजेपी के जन्मदाता श्यामाप्रसाद मुखर्जी राम और लक्ष्मण की तरह दिखाए गए हैं और महात्मा गाँधी एवम अन्य स्वतन्त्रता सेनानियों को रावण मानकर उन पर तीर चला रहे हैं। इसमें सरदार पटेल और नेताजी को भी इन्होंने रावण के दो शीश माना है। अब देखो बीजेपी का असलीयत! आज ये अपने फायदे के लिए कांग्रेस के ही नेताओं  सरदार पटेल और नेताजी को सर्वश्रेष्ठ नायक बताते है और इन्ही नेताओं को इनके जन्मदाता खलनायक बताते थे।

कभी करते थी बीजेपी सरदार पटेल से नफरत !


आरएसएस और बीजेपी वाले सरदार पटेल और नेताजी जिनका नाम लेते हुए आजकल इनका गला नही थकता कभी इनसे नफरत करते थे और इनको देश के बंटवारे के लिए दोषी  मानते थे। सरदार पटेल और नेताजी अगर गलत थे तो आज सही कैसे हुए? या तो आरएसएस और बीजेपी के पूर्वज गलत थे या इनके वंशज गलत है? अंग्रेजों का फूट डालो और राज करो का सूत्र अपनी जेब में डालकर आरएसएस को दे गए थे जिसको ये धारण करते हैं।

लगाया था पटेल जी ने आरएसएस पर बैन 


पटेल जी जब ग्रह मंत्री थे और महात्मा गांधी की हत्या हुई तब पटेल जी ने ही 4 फरवरी 1948 को आरएसएस पर बैन लगा दिया था। बाद में 11 जुलाई 1949 को सशर्त बैन हटाया गया कि वे कभी राजनीति नही करेंगे बल्कि सांस्कृतिक संगठन के रूप में काम करेंगे। भारत के तिरंगे और संविधान के प्रति वफादार रहेंगे, साम्प्रदायिकता को बढ़ावा नही देंगे इतना ही नही 1975 एवम 1992 को भी आरएसएस पर प्रतिबंध लग चुका है।

आज बीजेपी आरएसएस के सपनों को साकार करने का कार्य कर रही है अन्यथा पटेल और नेताजी आज बीजेपी के कैसे खासम खास हो गए? और गांधीजी पर दोयम दर्जे की राय रखते हैं लेकिन नेहरू अकेले गलत थे? जबकि जिस समय नेहरू प्रधानमंत्री थे , पटेल उपप्रधानमंत्री थे, जिस समय देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा थे  नेताजी सुभाष चन्द्र उस समय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष थे और सबसे बड़ी बात कि पटेल हो नेहरू दोनों ही नेता गांधीजी के बिना न तो कुछ थे और न कुछ करते थे।



गांधीजी के मौत से व्यथित होकर मृत्यू 



सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उनको नमन। नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गाँधी की हत्या से सरदार वल्लभ भाई पटेल को गहरा धक्का लगा जिसके चलते उन्हें ह्रदयाघात भी हुआ। सरदार पटेल ने गांधीजी की हत्या से व्यथित-क्रोधित हो कर जनसंघ (वर्तमान में आरएसएस) प्र प्रतिबन्ध भी लगा दिया था। गाँधी जी की मृत्यु के बाद सरदार पटेल की तबियत बिगड़ती ही चली गयी और अंततः 15 दिसंबर 1950 में उनकी मृत्यु हो गयी। 1951 में स्वतन्त्र भारत के प्रथम चुनाव हुए जिसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री चुने गए।