जानिए पंचशील ध्वज के जनक :और प्रथम बुद्धिस्ट अमरीकन व्यक्ती के बारे में - HUMAN

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Tuesday, 20 November 2018

जानिए पंचशील ध्वज के जनक :और प्रथम बुद्धिस्ट अमरीकन व्यक्ती के बारे में

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 हेन्री स्टील ओल्कोट 

पंचशील ध्वज के जनक और श्रीलंका में बुद्ध धम्म का पुनरुत्थान करनेवाले अमरीकन सैनिकी अधिकारी, पत्रकार, वकील कर्नल हेन्री स्टील ओल्कोट यह बुद्ध धम्म स्वीकार करनेवाले प्रथम अमरीकन इंसान थे। ओल्कोट इन्होंने श्रीलंका में बौद्ध धम्म को पुनः जीवित किया। इस वजह से उन्हें आज भी श्रीलंका में स्वतंत्रता लड़ाई के और आज के धार्मिक, राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के अग्रगण्य नायक के रूप गौरवान्वित किया जाता हैं।

1880 में कर्नल ओल्कोट दामोदर मालवनकर इनके साथ गॅले (श्रीलंका) गये । वहा उन्होंने पंचशील ग्रहण कर बौद्ध धम्म का स्वीकार किया।

ओल्कोट इन्होंने 1885 में बौद्ध ध्वज के निर्मिती  के लिए नियुक्त कमिटी में सल्लागार के तौर पर कार्य किया।ओल्कोट के मदद से डिजाइन किया गया बौद्ध ध्वज बाद में बौद्धो के जागतिक फेलोशिप और बौद्ध परंपरा के  सार्वभौम प्रतिक के रूप में स्वीकृत किया गया। श्रीलंका में बुद्ध जयंती के दिन सरकारी छुट्टी मान्य की।  श्रीलंका में बौद्ध पुनरुत्थान के वक्त तीन महाविद्यालय और 205 स्कुल स्थापित कीये गये थे । जिस में 177 स्कूलों को शासकीय अनुदान मिला था।

कोलंबो और गॅले यहा के दो मुख्य रास्तो को ओल्कोट इनका नाम दिया गया है। साथ ही कोलंबो फोर्ट रेल्वे स्टेशन के सामने उनका एक पुतला हैं। बौद्ध शिक्षा में उनके द्वारा दिए गये योगदान के सन्मानार्थ उनके श्रीलंका मे अनेको स्मारक स्थापित किये गए हैं।

1879 में ओल्कोट भारत आये और कुछ समय तक वे बॉम्बे में रहने लगे। भारत में उन्होंने स्थापित की हुयी थिलोसॉफिकल सोसायटी के प्रथम अधिवेशन में "स्वदेसी" आंदोलन का मुद्दा सर्वप्रथम उपस्थित किया था।



*पंचशील ध्वज का इतिहास 

ध्वज की मूल रचना इसा 1885 में कोलंबो श्रीलंका यहा हुयी। इस समिति में  पूज्य हिक्कादुवे सुमंगल थेरा (अध्यक्ष),पूज्य मीगेत्तुवेत्ते गुनानन्द थेरा, डोनाल्ड डॉन कारोलिस हेवाविथारना, अन्द्रीस बायर धम्मगुनवर्धना,चार्ल्स ए. डिसिल्व्हा, पीटर डी. अब्रेउ, विल्यम डी अब्रेऊ, विल्यम एल. फर्नाडोचा,एन. एस. फर्नाडोचा और कार्लिस पूजिथा गुणवर्धना(सचिव)इनका समावेश था।

बौद्ध ध्वज सर्वप्रथम 28 मई 1885 को बैसाख पूर्णिमा (बुद्ध जयंती) इस त्यौहार के दिन ब्रिटिश सरकार के राज में सुट्टी के दिन लहराया गया। ध्वज की मूलतः रचना समिति ने कीये  हुए पंचशील ध्वज में कर्नल हेन्री स्टील ओल्कोट इन्होंने बदलाव करने को सूचित किया ।अंगारिका धम्मपाल और कर्नल ओल्कोट इन्होंने वो म्यानमार के सम्राट के तरफ सौप दिया। इसा सन 1952 को जागतिक बौद्ध परिषद ने इस ध्वज को आंतरराष्ट्रिय बौद्ध ध्वज के रूप में स्वीकृत किया।






*बौद्ध ध्वज में शामिल पाच रंगों का अर्थ

1)नीला - स्नेहपूर्ण प्रवृत्ती  और दयालु स्वभाव, शांती और वैश्विक करुणा
2)पीला - मध्यम मार्ग, निश्चल शांती
3) लाल - यशसिद्धि, समझदारी, सदाचार, संपन्नता और प्रतिष्ठा
4)सफेद -धम्म शुद्धता, सर्वत्र स्वतंत्र भिमुख निर्मलता
5)नारंगी - ज्ञान और समझदारी
और
6)सभी रंगों का सम्मिलन करनेवाली पट्टी तेज सम्मिलन (aura's spectrum) दर्शाती हैं। ये रंगों का एकत्रीकरण मतलब रोशनी का सार हैं।