पेरियार स्वामी के नेतृत्व में एक सत्याग्रह ये भी किया गया था : जाणिये इस सत्याग्रह के बारे में - HUMAN

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Wednesday, 21 November 2018

पेरियार स्वामी के नेतृत्व में एक सत्याग्रह ये भी किया गया था : जाणिये इस सत्याग्रह के बारे में





भारत एक ऐसा देश है जहा पाणी पिणे से लेकर रास्ते से गुजरणे तक के  बातो के लिये भी अपना हक मांगना पडा था इस देश के मुलनिवासियो को, ऐसा ही एक सत्याग्रह करणा पडा था रास्ता सत्याग्रह ....

रास्ता सत्याग्रह 

जहा जहा हिंदू धर्म के सनातन वृत्ती की तीव्रता ज्यादा थी,उस उस जगह छुआ छुत की तीव्रता भी अधिक थी तीव्रता उत्तर भारत की तुलना मे दक्षिण भारत मे ज्यादा थी | दक्षिण भारत मे कुछ तरह के ऐसे रास्ते है जहा से अछुतो को गुजरने की सख्त पाबंदी है | वह रास्ते सिर्फ सवर्णो के लिये रिजर्व है | इस बात की कल्पना भी उत्तर भारतीय नही कर सकते | दक्षिण भारत के जिस मलबार प्रांत मे तथाकथित जगदगुरु शंकराचार्य का जन्म हुआ था,उसी मलबार प्रांत मे एक गाव है .. जिसका नाम है वायकोम | वहा सार्वजनिक रास्ते से गुजरने का मानवाधिकार प्राप्त करणे के लिये, उस प्रांत के सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी नेता रामास्वामी नायकर इनके नेतृत्व मे दनदणीत सत्याग्रह किया गया |


अछुतो के उस रास्ते से चलने के साहस से ब्राम्हण बहुत हि क्रोधीत हुये | उनको लगा होगा उन रास्ते पर उन्होने जीन पत्थरो के भगवानो को स्थापित करके रखा है कही अछुतो के इस उद्दंडता से वो डर कर भाग ना जाये | उस रास्ते से गुजरने का साहस दिखाने वाले उन अछुतो को सनातनी सवर्णो ने बहुत हि बुरी तरह से  मारा | मलबार संस्थान का कायदा भी उस वक्त ब्राह्मणो के हि आधिपत्य के नीचे था | लेकीन जब यह बात अखबार मे छप चारो तरफ फैल गयी तब अन्य प्रांतो मे से असंख्य सत्याग्रही उस गाव की तरफ जाने लगे | सरकार ने इन सत्याग्रहीयो को रोकने के लिये हर जगह नाका बंदी की और बडे तौर पर सैनिको की फौज बुलाई | न्याय तो देखो इन लोगो का !





ब्राह्मणो की भाडोत्री सरकार ने सत्याग्रहीयो का साथ देणा छोड उन्हे हि मारा | लाठी और शस्त्रो से सज्ज होकर वे सत्याग्रहियो की राह देख रहे थे | सत्याग्रहीयो को वे जानवर समझ रहे थे | बादमे कम दिमाग सरकार को समझाना पडा, की इस तरह से गर सार्वजनिक रास्ते से गुजरने पर पाबंदी लगायी गयी तो पुरे देश मे और विदेशो मे भी सरकार की इज्जत नही रहेगी | ये बात सरकार को रास आयी और उन्होने यह प्रतिबंध हटा दिया | सत्याग्रह सफल साबित हुआ | इस सत्याग्रह की सफलता को देख डॉ. बाबासाहाब को बहुत हि ख़ुशी हुई |