बाबासाहाब के प्रती स्त्रियो की संवेदनशीलता : और उनको किया हुआ बाबासाहाब का प्रबोधनपर भाषण, पढिये - HUMAN

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Thursday, 22 November 2018

बाबासाहाब के प्रती स्त्रियो की संवेदनशीलता : और उनको किया हुआ बाबासाहाब का प्रबोधनपर भाषण, पढिये

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*तारीख २७ दिसंबर १९२७ महाड सत्याग्रह परिषद औरतो को किया हुआ भाषण स्त्री मुक्ती का जाहीरनामा 


डॉ. बाबासाहब को देखने के लिए बहुत बड़ी तादाद में औरतो की भीड़ इकठ्ठा थी। ये औरते दूर दूर के गाँव से नौ-दस किलो मीटर की दुरी तय कर बाबासाहब को देखने के लिए आयी थीं। कुछ औरते तो अपने छोटे बच्चो को घर में छोड़ आयी थी।

उन में से एक बुजुर्ग महिला आयी बाबासाहब को देख जोर जोर से रोने लगी। वो देख भीड़ में इकठ्ठा सभी लोगो को लगा की इस महिला को जरूर किसी सवर्ण गुंडे ने छला होगा। उससे पूछने पर पता चला की उसे किसीने बताया था की आपके राजा का (बाबासाहब) रास्ते में अपघात  हुआ ऐसे मुझे किसी दुष्ट ने बताया। तब उस औरत के रोने की वजह और इतने औरतो की आने की वजह क्या हैं ये लोगो के ध्यान में आया।

देखने आयी औरतो को देख बाबासाहब ने उन औरतो को किया हुआ भाषण

आप के आने से मैं बेहद खुश हूं। आप जिस तरह घर की समस्याएं स्त्री और पुरुष दोनों मिल के हल करते हो उसी तरह इस समाज रूपी परिवार की समस्याएं स्त्री-पुरुष दोनों ने मिल के छुड़ानी चाहिए। किसी एक पुरुष के मुकाबले एक औरत अगर कोई भी काम करने का ठान ले तो उस कार्य में हम जल्दी यश संपादन कर सकते हैं। लेकिन पुरुष  फिर भी ये काम अकेला आगे आकर संभाल रहा है ये सब, तो आपने उसको मदद करनी चाहिए। आप सभी ने ऐसी परिषद को उपस्थित रहना चाहिए ये मैं आपसे कह रहा हु।





सच कहें तो छुआ-छूत दूर करने का सवाल पुरुष वर्ग का नही बल्की औरतो का ही हैं। आपने हम पुरुषो को जन्म दिया हैं। बाक़ी लोग कैसे हम लोगो को जानवरों से भी बदतर समझते हैं ये आपको पता हैं। कितना   अपमानास्पद बर्ताव अपने साथ किया जाता हैं यह  आपको पता होने के बावजूद भी आपने हमे जन्म क्यों दिया अगर कोई आपसे ये सवाल पूछे तो उसका जवाब आपके पास होगा क्या? सवर्ण औरतो के पेट से जन्मे हुए और आपके पेट से जन्मे हुए बच्चों में क्या अंतर है। आपने सोचना चाहिए ब्राम्हणों के औरते जितनी शीलवान है उतनी आप भी हो । वो जितना अपने पती से वफादार है उतनी आप भी हो । ऐसा होते हुए भी ब्राम्हण औरतो के पेट से जन्मे हुए बच्चे सर्वसामान्य और आपके पेट से जन्मे हुए बच्चे सभी जगह क्यों अपमानित हो? इसके बारे में आपने कभी सोचा हैं क्या? मुझे लगता हैं आपने इसके बारे कभी सोचविचार किया ही नही, अगर किया होता तो पुरुषो से पहले आप औरते आंदोलन करती।

*गलत / गंदी रीवाजो का त्याग 


दूसरी बात आपको जो बतानी है वो ये की, आप सभी ने पुराने और गलत, गलिच्छ रिवाजो का त्याग करना चाहिए। सच कहें तो अछूत लोगो में वो अछूत हैं ऐसी पह्चान कराने वाला कोई सिक्का उसके माथे पे नही छपा है। लेकिन अछूतों की जो रिवायतें हैं उन गन्दी रिवायतों की वजह से कोई इंसान अछूत जाती से है ये जल्दी पहचान में आ जाता हैं। ये परम्पराये किसी समय जबरदस्ती से थोपी गयी थी ऐसा मेरा मत है उनको अभी से हमने छोड़ देना चाहिए। ज्ञान और विद्या सिर्फ पुरुषो के लिए ही नही औरतो के लिए भी बहुत जरूरी है। अपनी आनेवाली पीढ़ी अगर आपको सुधारनी है तो लड़कियों को शिक्षा दो। जो उपदेश मैंने आपको किया हु उसका पालन करेंगे ऐसी उम्मीद आपसे है।