ईतने दिनों के चलते मैं खुद के ही विरोध में था : ऐसा नागराज मंजुळे ने क्यो कहा ... - HUMAN

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Tuesday, 27 November 2018

ईतने दिनों के चलते मैं खुद के ही विरोध में था : ऐसा नागराज मंजुळे ने क्यो कहा ...



फुले, अम्बेडकर सर्वोपरी हैं....नागराज मंजुले

जन्म से वैसे तो मैं भी दलित ही हु लेकिन मैं ऐसी जाती में जन्मा जो खुद को दलित नही मानती । कैकाडी, वडार (महाराष्ट्र) यह समाज खुद को दलित नही मानता। महार जाती को छोडो तो सभी खुद को हिन्दू कहते है। हम दलित शुद्र है ये उन्हे पता भी नही है। लेकिन अछूत होने के सभी यातनाये वो सह रहे थे, लेकिन दलित है यह समझ में नही आ रहा था।


समझ में ही नही आ रहा था कि मैं दलित हु।घरमे अन्धविश्वास था। तुलजापुर जाके घर आकर  अनेक तरह के विधि संपन्न होते थे। घर के लोग महार जाती के लोगो को अंदर नही आने देते थे। और उसके हमारे घर के लोगो को बाकि जाती के लोग अपने घर नही आने देते थे। दलित हु मैं ये ध्यान में ही नही आता था मुझे। बीए करते वक्त कुछ कुछ ध्यान में आने लगा। बीए पढ़ते वक्त अंबेडकर का छोटा चरित्र ग्रन्थ पढ़ा और समझ आया की इस इंसान के कारण आज मैं यहा हु । फुले, अंबेडकर अपने पीता हैं। फिर ध्यान में आया की ईतने दिनों के चलते मैं खुद के ही विरोध में था।