हनुमान को सीएम योगी ने कहा दलित : ब्राम्हण महासभा ने भेजा नोटीस - HUMAN

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Wednesday, 28 November 2018

हनुमान को सीएम योगी ने कहा दलित : ब्राम्हण महासभा ने भेजा नोटीस

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राजस्थान के चुनाव में जाती और धर्म कि सियासत देवताओ तक पहूच गयी है | 
चुनावी जंग जितने के लिये जहा राजनैतिक दल हर तरह का पैतरा आजमा रहे है वहा योगी आदित्यनाथ ने हनुमान को हि दलित बता दिया | योगी इस वक्तव्य पर हनुमान को जाती में बाटने का आरोप लगाते हुये ब्राह्मण महासभा ने कानुनी नोटीस भेजा है | 

हनुमान को कहा दलित,वनवासी, आदिवासी 

अलवर जिले के मालखेडा एक सभा को संबोधित करते हुये योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली हनुमान को दलित, वनवासी,आदिवासी और वंचित करार दिया | योगी ने मौजूद जनसभा को संबोधित करते हुये कहा, कि हनुमान एक ऐसे लोकदेवता है, जो स्वयं वनवासी है, गिरवासी है,दलित और वंचित है | योगी ने सभा में कॉंग्रेस पार्टी पर लगातार हमला करते हुये जातिगत वोटबैंक साधने कि लगातार कोशिश कि | 

योगी आदित्यनाथ के इस वक्तव्य पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने पल्ला झाडते हुये कहा है कि, ये काँग्रेस को जवाब देणे के लिये कहा होगा | वही कॉंग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि ये लोग वोट के लिये जाती को भी नही छोडते है |  

जनेऊ वाला कैसे दलित हुआ योगी जी? 


हनुमान चालीसा का श्लोक,
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।
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जनेऊ वाला कैसे दलित हुआ योगी जी? यदि हुआ तो बताइए कि एक दलित का जनेऊ संस्कार जन्म के कितने वर्षों में होता है? वैसे इसका जवाब तो किसी के पास नही लेकिन कुछ अन्य बातें जरूर साबित हुई है जिनमे सबसे पहली बात डॉ राम पुनियानी जी ने कुछ वर्ष पूर्व कही थी कि आरएसएस एक ऐसा मिशन चला रहा है जहां आदिवासी और दलितों के बीच जाकर वह राम की बजाय हनुमान की फोटो, मूर्तियां दे रहे हैं। इसके पीछे उन्हें शक्तिशाली और बलशाली बताने के अलावा समर्पित भाव की व्याख्या की जा रही है जहां उनको प्रेरणा दी जा सके कि वे अपनी ताकत या बुद्धि की बजाय केवल श्रद्धा और समर्पण याद रखें। जबकि बाकी अन्य सम्पन्न जगहों पर वह राम की मूर्ति और तस्वीरें देते हैं जिसका अर्थ है शासन करना।

एक प्रदेश का मुखिया व धर्मभीरु इस बात को कह रहा कि हनुमान एक आदिवासी और दलित थे तो यकीनन उस प्रायोजित एजेंडे का स्वरूप है जिसका तर्क से कोई मतलब नही बस भक्त और वक्त से है। तथा जिन्होंने जब ऐसी कल्पना की वह धीरे धीरे अब जाकर बाहर निकल कर आ रही है। अंतिम बात यह कि जाति, धर्म, सम्प्रदाय, वर्ण, कुल, गोत्र तक पहुंचने वाली यह राजनीति बहुत कुछ स्पष्ट संकेत दे रही है।