जब देणी चाही थी दिलीपकुमार ने कॉलेज के लिये देणगी : क्यो मना किया था बाबासाहाब ने? जाणिये - HUMAN

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Saturday, 3 November 2018

जब देणी चाही थी दिलीपकुमार ने कॉलेज के लिये देणगी : क्यो मना किया था बाबासाहाब ने? जाणिये

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औरंगाबाद का मिलिंद कॉलेज.. मराठवाड़ा, महाराष्ट्र के अंबेडकरी आंदोलन का मुख्य स्थान !मराठवाड़ा(महाराष्ट्र) शैक्षणिक रूप से आत्यंतिक पिछड़ा। वहा शिक्षा का बीज बोया तो लाखो अछूत भाइयो का आसानी से उत्थान होगा इसीलिए पीईएस का सबसे बड़ा जाल औरंगाबाद में ही बाबासाहब ने खड़ा किया। बाबासाहब जब कभी औरंगाबाद आते तब उनका रहना रेल्वे होटेल में निश्चित रहता था। ये वही रेल्वे हॉटेल है जो आगे अशोका के रूप में पहचाना जाता।

मिलिंद कॉलेज की स्थापना से लेकर उसके खड़े होने तक माई साहब बाबासाहाब के साथ छाव जैसे खडी थीं। बाबासाहब के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिये माई साहब के छोटे भाई बालु  कबीर भी उनके साथ थे। उस समय दिलीप कुमार लोकप्रियता के शिखर पर थे। उनके एक के पीछे एक आयी फिल्में बहुत बडी हिट हो चुकी थी। बाबासाहब औरंगाबाद में जिस हॉटेल ठहरे थे उस  वक्त दिलीप कुमार भी योगायोग से उसी हॉटेल में थे।


बालू कबीर की तरफ से दिलीप कुमार इनको वे रुके हुए होटल में बाबासाहब भी है यह मालूम पड़ा। उन्होंने ही दिलीप कुमार और बाबासाहब की मुलाकात करायी। प्राइमरी इंट्रोडक्शन बालू कबीर ने ही कराई दोनों की। बाबासाहब ने अपनापन दिखाते हुए दिलीप कुमार इनका स्वागत किया। दोनों की अनेक विषयों पर बाते हुयी।राजकारण से लेकर फिल्मों तक ऐसी बहुत सी बातें। बाद में टॉपिक आया वो मिलिंद कॉलेज का। दिलीप कुमार ने मिलिंद कॉलेज को बहुत बडी आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव बाबासाहब के सामने रखा। बाबासाहब शांति से सुन रहे थे और दिलीप कुमार के इस प्रस्ताव पर हल्के से मुस्कुराके शांत हुए। दिलीप कुमार ने फिर निधी के संदर्भ में बात की और मिलिंद कॉलेज के प्रवेश द्वार को अपना नाम देने की शर्त भी रखी।

अभी लेकिन बाबासाहब को गुस्सा आया। उन्होंने दिलीप कुमार को स्पष्ट बातो में सुनाते हुए कहा कि, फिल्मजगत के लोगो में कैरेक्टर नाम की बात ही नही होती ये बात दुबारा आपने आज साबित की। बाबासाहब ने दिलीप कुमार को बहुत कुछ सुनाकर उनके निधि को ठुकराया।



जब बालू ने कहा लेणी चाहिये थी राशी ...?


बालू कबीर पर क्रोधित होते हुए बाबासाहब ने कहा,"क्या कह रहे हो? बेवकूफ हो तुम। अपना शील,चरित्र का प्रदर्शन लोगो के सामने रखकर जिन्होंने धन दौलत कमाई ऐसे लोगो की तरफ से मैंने कभी भी पैसो की अपेक्षा नही की और करूँगा भी नही। जिन्होंने अनीति और भ्रष्ट तरीके से संपत्ति इकट्ठा की, उनके सहायता की जोर पर ज्ञान दान जैसा पवित्र कार्य मैं कभी नही करूँगा। फिर मेरी संस्थाए खत्म हुई तो भी बेहतर!

बताने का उद्देश्य इतना ही... पैसो का दान देनेवाले का इंटेंशन महत्वपूर्ण होता हैं। इंटेंशन गलत हो तो उसके द्वारा दी गयी रक्कम का कोई मोल नही होता। आज मिलिंद कॉलेज किसी भी सहायता के बिना खड़ा है। अपने स्वाभिमान और प्रतिभा के दम पर |


source- माई साहेब आंबेडकर लिखित, 'बाबासाहेबांच्या सहवासात' हिंदी अनुवाद