बाबासाहाब का रमाई को लिखा हुआ पहला खत - HUMAN

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Tuesday, 20 November 2018

बाबासाहाब का रमाई को लिखा हुआ पहला खत




बडोदा के सयाजीराव गायकवाड ने चार छात्राओ को स्कॉलरशिप देकर अमेरिका उच्च शिक्षा के लिये भेजना  तय किया |उसमे बाबासाहब आंबेडकर का भी नाम सम्मिलित था |भीमराव अमेरिका जायेंगे, रमाई के मन मे सवाल आया , की आखिर अमरिका है कहापर ? बाबासाहब ने रमाई को बताया,  अमरिका सात समुंदर पार है,रेलगाडी से भी तेज दौडणे वाले जहाज से अमरिका पहुचने में देढ महिने का वक्त लगता है | उधर से मै तीन - चार साल तक लौट वापस नही आ सकुंगा| यह सून रमाई  चिंतीत हो पडी | लेकीन बाबासाहब के एक सवाल से उसका ध्यान हट गया | बाबासाहब ने पूछा,'रामू लेकीन घर की देखभाल कैसे होगी, खर्चा पुरा कैसे होगा' | लेकीन रमाई ने जल्द इस सवाल का जवाब दिया ....'साहब आप यहा की चिंता मत करना ,मै हु ना ..मै संभाल लुंगी सब,आप सिर्फ पढाई पर ध्यान देना'






  बाबासाहाब अब अमरिका जानेवाले थे वो दिन आया| साहब अब चार साल तक दिखेंगे नही इस खयाल से रमाई बहुत हि व्याकुल थी , बाबासाहाब की छवी आंखो मे भर लेना चाहती थी | सफर के लिये सभी ने शुभकामनाये दी|और बाबासाहाब चल पडे |




*बाबासाहाब का खत.....

उस वक्त अब के जैसे फोन नही थे | खत के अलावा विकल्प नही था |और बाबासाहाब का रमाई को पहला खत आया |रमाई के जिंदगी का पहला खत था वह | रमाई ने डाकिया के हाथ से मानो छीन हि लिया खत | और बेसब्र रमाई खत खोलके पढने भी लगी| डाकिया देखते ही रह गया | उसने सोचा था की, खत पढ के सुनाना पडेगा| ....दो तीन बार रमाई ने खुद खत पढा बाद मे सबको पढके सुनाया...न्यूयार्क, कोलंबिया विद्यापीठ से पोयबावाडी के पतेपर ....

प्रिय रामुको,
अनेक आशीर्वाद ,

          २१ जुलाई १९१३ को दोपहर १२ बजे अमरिका सकुशल  पहुचना हुआ | कोलंबिया विद्यापीठ गया वहा मेरी अच्छेसे खातिरदारी हुई |युनिवर्सिटी  और होस्टेल मे दाखिला मिला|लेकीन रामू रास्तेमे  तुम्हारा चेहरा आन्खोके  सामने से एक पल के लिये भी ओझल नही हो रहा था | तुमने अगर हिम्मत ना बढाई होती तो यह फैसला मै नही ले पाता|तुम्हारा करू उतना शुक्रिया कम हीहै |

     यहा के विश्वविख्यात  कोलंबिया युनिवर्सिटी मे  एम.ए.के लिये दाखिला किया | उसी के साथ पीएच.डी.कर रहा हु | रामू यह देश हिंदुस्थान जैसा नही है |यहा हर इन्सान को लिखने की  ,बात करणे की हर जगहआणे जाने की पुरी आझादी है | मै यहा कही भी पाणी पी सकता हु |यहा अछूत कह्के मेरा अपमान नही किया जाता |यहा कोई भी अछूत नही |निग्रो कहके हमारे जैसे ही गरीब जमाती है लेकीन वो अछूत नही |निग्रो आजादी से मनमुताबिक गोरो के साथ मिलजुलकर रहते है |यहा का पुरा वातावरण देख लगता है ,हमारे अछूत समाज को शिक्षा के अलावा और कोई विकल्प नही |

      रामू तुम्हारी बहुत याद आती है |बाबा मेरे स्फुर्तीदाता  और तुम मेरी स्फुर्तीदेवता हो |लक्ष्मीवहिनी,शंकर ,गौरा,मुकुंद सबकी याद आती है | यशवंत की तबियत नाजूक है उसे संभालना |तुम्हे लिखना आ रहा है ,तुम्हारे अक्षरो मे लिखा हुआ खत जल्दी भेजना|

     मेरा पत्ता - काॅस्माॅपालीटन  क्लब,५६४,
                      पश्चिम  ११४ स्ट्रीट,न्यूयार्क .

                                                                                      तुम्हारा ,
                                                                                                       भीमराव  आंबेडकर 



***हिंदी अनुवाद