जब बाबासाहाब महार बटालियन सें मिलने कश्मीर गये तो रोये क्यो थे? वजह जाणिये .... - HUMAN

Breaking

Sunday, 4 November 2018

जब बाबासाहाब महार बटालियन सें मिलने कश्मीर गये तो रोये क्यो थे? वजह जाणिये ....




डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जी का महार बटालियन के साथ एक प्रसंग


कश्मीर की सीमापर दूसरी बार महार बटालियनने शौर्य और धैर्य का जो अभूतपूर्व लड़ा दिया, वो देख सभी सैनिकी अधिकारी स्तब्ध रह गए थे। हम पुरे यकीन के साथ कहते है हमारी यह महार बटालियन अगर कश्मीर कि सिमा पर ना लड़ी होती तो पूरा कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे में गया होता। महार बटालियन का ये पराक्रम देख बाबासाहब की आँखे नम हुयी।

   सन 1949 में डॉ.बाबासाहब अंबेडकर इस महार बटालियन से मिलने कश्मीर गये। मिलिटरी मैदान में बाबासाहब आये। सभी सैनिकों के चेहरे पर खुशी की लहर साफ दिखाई दे रही थी। बाबासाहब को प्रत्यक्ष देखने का सौभाग्य जो उन्हें मिला था।





 बाबासाहब ने अपनी प्यार भरी नजर से चारों तरफ देखा। हर सैनिक आदरपूर्वक नतमस्तक होकर खड़ा था। उसी क्षण बाबासाहब के आँखों में आंसू आये। एक ही पल में वहा गम्भीरता छाई। एक सैनिक बाबासाहब की तरफ आया और उसने पूछा," बाबा ! क्या हुआ, जल्दी बताओ। हम आपके लिए खून की..."
लेकिन उस जवान की बात खत्म होने से पहले ही बाबा ने कहा,"ऐसा कुछ नही हैं ! बात ये हैं...,

    कुछ सालों पहले याने भारत को आजादी मिलने से पहले अंग्रेजो ने फायोनियर कोर्स के लिए ( कम दर्जे के काम जैसे रस्ता बनाना, रास्ता बनाते समय पत्थर की नींव डालना, पुल बनाना जैसे काम) अपने आदमी देने के लिए मुझे लिखा था।

    मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा, मेरे आदमी शूरवीर हैं। शत्रु पक्ष से दो हाथ करने की क्षमता अन्य लोगो में से उनमे अधिक हैं। आप मेरे बच्चो को दो हाथ करने का मौका देकर तो देखिये।"

अंग्रेजो ने मेरी सिफारस देखते हुए कामठी (नागपूर ) में पहली महार बटालियन की स्थापना की। उसके  दो सालों बाद दूसरी महार बटालियन स्थापित की गयी। आप लोगो ने मेरी बातों को सच कर दिखाया ये देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है | मेरे आंख में आये हुये यह आसू ख़ुशी और समाधान के है |

  बाबा के ये शब्द सूनकर सभी का मन भर आया |


source- डॉ. बाबासाहाब आंबेडकरांच्या आठवणी हिंदी अनुवाद