कैसे संभाला था बाबासाहब ने गुस्से से तिलमिलाते हुये लोगो को ? - HUMAN

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Thursday, 15 November 2018

कैसे संभाला था बाबासाहब ने गुस्से से तिलमिलाते हुये लोगो को ?

डॉ.बाबासाहाब आंबेडकर



अपने निहत्थे और बेसावध लोगो पर सनातनी मनुवादियों के द्वारा किये गए हमले की बात सुनकर सभी अछूतों के प्रतिनिधी इकठ्ठा हुए और मनुवादियों को इस हमले का जवाब देने का निश्चित किया। घायल जवानों का लहू देख उनकी तड़प देख बाबासाहब का युवा खून ख़ौल उठा। लेकिन बड़े ही शांति और समझ के साथ उन्होंने अपना गुस्सा काबू किया। इतना ही नही घटित घटना पर अपने लोगो को समझाते हुए एक बहुत ही परिणामकारक भाषण उन्होंने किया।" इस समय खुद को सँभालते हुए ,उलट जवाब ना देते हुए प्रतिकार हमे नही करना है। मरणा है, मार सहनी है लेकिन सनातनी लोगो को उनकी असुरी प्रव्रत्ति दिखाने को मजबूर करना है। ''

बाबासाहब का ये आदेश सुनते ही वो पाच हजार लोगो का समुदाय इस संकट की घड़ी का सामना करने हेतु तत्पर हुआ। मिलिटरी में लड़ने वाले, अफगान युद्ध, महायुद्ध में जो अपने प्राण की पर्वा ना करते हुए लड़े थे ऐसे सिपाही उस वक्त बाबासाहब के पास थे। अगर उस वक्त उन्होंने प्रतिपक्ष पर हमला किया होता तो इन मनुवादियों को  बचकर भागने को भी जगह ना मिली होती। इंसानो के शवो से महाड़ की जमी उस वक्त लदी होती। लेकिन बाबासाहब के आज्ञा का पालन उस वक्त उन्होंने बड़ी शिस्तबद्ध तरीके से किया।


डॉ.बाबासाहाब आंबेडकर



प्रतिपक्ष की तरफ से पत्थरो की बौछार होने पर भी अपने सेनापति के आज्ञा का उलंघन उस वक्त उन्होंने नही किया। पत्थर सर पर पड़ रहे थे लेकिन फिर भी शांत रहकर  उन्होंने हम अपने पुढारी की बात को कितना महत्व देते है ये दिखा दिया। सहनशीलता और अत्याचारी व्रुत्ती की उस वक्त सीमा पार हुई थी। प्रतिपक्ष पर हमला कर उस वक्त जो ना हो सका होता वो शांती का भंग न कर देते हुए बाबासाहब ने किया था और सनातनी लोगो असुरी व्रुत्ती उन्होंने सामने लायी। इतना घटित होने के बाद पोलिस वहा आये और मनुवादियों को गिरफ्तार किया। खून से लदे अपने प्रतिनिधियो को बाबासाहब ने खुद अस्पताल पहुचाया । डॉक्टर साहब पर उनके अनुयायीयो का कितना प्रबल यकीन हैं ये बात इस समय पूरी साफ दिखाई दे रही थीं।आगे मनुवादि गुंडों पर पुलिस द्वारा मुकदमे दर्ज किये गये । अछूतों को बेवजह छलने करने के जुर्म में उन्हें यथायोग्य सक्त मजूरी की भी सजा मिली।