देश की कौनसी समस्या को उजागर किया था बाबासाहब ने सौ साल पहले : जिसका असर हमे आज साफ दिख रहा है - HUMAN

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Thursday, 22 November 2018

देश की कौनसी समस्या को उजागर किया था बाबासाहब ने सौ साल पहले : जिसका असर हमे आज साफ दिख रहा है



1938 में देश को परिवार नियोजन बतानेवाले राष्ट्रनेते


सौ साल पहले उन्होंने किसानों की पीड़ा, खेती से संबंधित समस्याएं दर्शाने वाली  पहिली किताब लिखी।
बाबासाहब देश को "ऊर्जा शिक्षा और जल शिक्षा की सबसे अधिक जरूरत हैं " ऐसा 1942 में बता रहे थे।

दिन ब दिन बढ़ती हुई जनसंख्या कि गम्भीर समस्या  पहचानकर 1930 के दशक में उसपर प्रतिबंध लगाने कि सलाह  देनेवाले तीन महापुरुष थे।
1)डॉ. बाबासाहब अंबेडकर
2)जे. आर. टाटा और
3)समाजस्वास्थकार र. धो. कर्वे .

डॉ. बाबासाहब अंबेडकर एक साहसी नेता थे। देश के प्रगती की तस्वीर आँख के सामने रखकर काम करनेवाले नेता थे। उन्होंने अपने स्वतंत्र मजदूर पक्ष के 1937 के इलेक्शन जाहिरनामे में ये आश्वासन दिया था कि एक या ज्यादा से ज्यादा दो बच्चे बस ऐसा कानून ही हम करेंगे। बाबासाहब ने अपनी बात पर अमल किया।

मुंबई विधानभवन में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और कुटुंब कल्याण विधेयक लाया।
10 नवम्बर को वो मंजूर कराने के लिए उन्होंने काफी कोशिश की। तब उन्होंने परिवार नियोजन करनेवाले को इनाम और न करनेवाले को सजा, सीधा जेल ऐसी तरतूद कि सूचना की थी।




अगर अपने बाल-बच्चों को अच्छी शिक्षा, आरोग्य, रोजगार, छत और खुशहाल जिंदगी देनी हो तो एक पर ही रुक जाओ ये उनका नारा था।12 दिसम्बर 1938 को उसके लिए उन्होंने शिवाजी पार्क पर युवा परिषद ली थीं।

1952 के इलेक्शन जाहिरनामे में उहोने फिर आश्वासन दिया था कि एक या दो अपत्य ऐसा कानून हम करेंगे।

सौ साल पहले उन्होंने 1918 को किसानों की पीडा, खेती से जुडी समस्याये रखनेवाली किताब  लिखी। "स्मॉल होल्डिंग्ज इन इंडिया अँड देअर रेमेडीज"। खेती का बोझ कम करो, एक ही बेटा खेती के लिए रखो, दूसरे को उद्योग, व्यापार, शिक्षा,सेवा क्षेत्र के लिए तैयार करो।

खेतमाल को उत्तम बाज़ारभाव, सिचाई, और औद्योगिक दर्जा मिलना चाहिए। किसान सुखी  संपन्न तो देश खुशहाल। इन बातों पर अगर अमल ना किया गया तो देश डेंजर झोन में चला जायेगा, यह भविष्यवाणी उन्होंने सौ साल पहले की थी। बाबासाहब ने 1929 को प्रथम किसान परिषद ली। विधानभवन पर उनके द्वारा निकाला गया पहला मोर्चा दलितों के लिए  नही अपितु किसानों के लिए था। कसने वाले को जमीन मिलनी चाहिए इसके लिए उन्होंने खोती ख़ारिज करनेवाला विधेयक विधानभवन में रखा।

लंदन से बाबासाहब मुंबई निकले तब वहा के पुलिस आयुक्त ने मुंबई पुलिस को टेलीग्राम किया था,"प्रखर राष्ट्रभक्त, बुद्धिमान और उच्च विद्याविभूषित युवा भीमराव रा. अंबेडकर उधर आ रहा है, उसपर 24 घन्टे गुप्त नजर रखो।"

बाबासाहब और दलितों का समीकरण इतना पक्का आखा गया है कि 1919 को सर्वप्रथम "सभी भारतीय लोगो को वोट का अधिकार मिलना चाहिए" ऐसा साऊथ बरो कमिटी को बतानेवाले बाबासाहब हमे कहा पता है?


1928 को उन्होंने स्टार्ट कमिटी को बताया कि ओबीसी को घटनात्मक सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। 1946 को उन्होंने किताब लिखी 'अछूत पहले कौन थे।' सरकार ओबीसी के कल्याण हेतु ठोस कदम नही उठा रही इसीलिए कानून मंत्री पद से उन्होंने इस्तीफा दिया।

औरतो की तरक्की से देश की तरक्की नापी जानी चाहिए , अपने इस मत के चलते स्त्री-पुरुष समानता बहुत ही जरूरी हैं ऐसा वो बार बार बताते थे।

देश के ऊर्जामंत्री, पाट बंधारे मंत्री, सार्वजनिक बांधकाम खाते के मंत्री बाबासाहब देश को "ऊर्जा साक्षरता और जल साक्षरता की सबसे अधिक जरूरत हैं" ऐसा 1942 को बता रहे थे।

देश के पहले 15 धरणो का निर्माण करनेवाले, देश की बड़ी नदियों का एकत्रीकरण कर अकाल दूर करने का उपाय सुझाने वाले,पुरे देश को हाईवे से जोड़नेवाले, भारत को विकास चाहिए, बिजली, सड़के, पाणी मतलब विकास ये सूत्र वो तब रख रहे थे।

ऐसी शख्शियत को सिर्फ दलितों तक सीमित रखनेवाले हम भारतीयों से अधिक धूर्त और कोण होगा।

आधुनिक भारत के इस महान नेता को ,राष्ट्रनेता बाबासाहब को त्रिवार अभिवादन🙏🙏🙏