जब इंग्लैंड से आये डॉ.वेलबी कमिशन ने बाबासाहाब के विचार सुनने से मना किया था : तब जाणिये क्या कहा बाबासाहब ने - HUMAN

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Tuesday, 27 November 2018

जब इंग्लैंड से आये डॉ.वेलबी कमिशन ने बाबासाहाब के विचार सुनने से मना किया था : तब जाणिये क्या कहा बाबासाहब ने



 इंग्लैंड से भारत डॉ. वेलबी का एक कमीशन आया था। इस कमिशन पर रूपये का विनिमय मूल्य निश्चित करने की जिम्मेदारी सौपी गयी थी। इसके लिए पूरे दुनियाभर के अर्थतज्ञो को निमंत्रित किया गया था और उनके विनिमय मूल्य से संबंधित विचार सुने । अब आखिर में बारी थी बाबासाहब की। इतने में डॉ. वेलबी बाबासाहब को कहते हैं, डॉ. आंबेडकर मैंने पुरे विश्व के प्रसिद्ध विद्वान अर्थतज्ञो के विचार और संदर्भ सुने हैं तब अब आपके  विचार सुनने की जरूरत मुझे नही लगती।

इसपर बाबासाहबने शांती और विनम्रता से कहा, डॉ. वेलबी आपने जिस नामांकित और विद्वान अर्थतज्ञो के  मत और संदर्भ  सुने हैं उन विद्वानों और प्रसिद्ध अर्थतज्ञो ने  जिस किताब से ये संदर्भ बताये है उन किताबो का लेखक मैं हूँ। उस किताब के कुछ भाग लिखना शेष है मैं वो लिख सकता हु। यह सुन डॉ. वेलबी नीचे आये बाबासाहब के हाथ में हाथ डाल माफ़ी मांगी और रुपये का विनिमय शुल्क निर्धारित करने  की जिम्मेदारी बाबासाहब पर सौपी।




 बाबासाहब ने जिस तरह अपने जीवन में गरीबी का अनुभव किया, उस तरह शायद ही भारत के किसी नेता ने किया हो। लेकिन फिर भी कभी गरीबी का बहाना कर अपना स्वाभिमान कम नही होने दिया और आंदोलन को जारी रखा। इतनी गरीबी होते हुए भी कभी पैसो के खातिर बिके नही ।

पुरे विश्व ने उनके ज्ञान को स्वीकार किया वही अपने देश में उन्हे कल भी और आज भी जील्लत सहनी पडती है यह दुख कि बात है |