बाबासाहाब कि वो मुख्य पाच बाते : जो उन्होने धर्मान्तरण के वक्त कही थी.. जाणिये - HUMAN

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Thursday, 8 November 2018

बाबासाहाब कि वो मुख्य पाच बाते : जो उन्होने धर्मान्तरण के वक्त कही थी.. जाणिये




धर्मांतर हो गया : अब कर्मांतर कब ? 


सच बोले तो खुद के मा- बाप को तक गुस्सा आ जाता है| लेकीन कभी कभी खुद के मा - बाप को गुस्सा आ भी गया तो चलेगा लेकीन सच बोलणे की जब जरुरत हो तब सच बोलना ही चाहिये | १४ अक्तूबर १९५६ को बाबासाहाब ने अपने लाखो अनुयायीयो को साथ लेकर धर्मान्तरण किया | हिंदू धर्म का त्याग कर बौध्ह धर्म का अंगीकार किया और दुसरे दिन १५ अक्तूबर १९५६ को अपने ऐतिहासिक भाषण में बाबासाहब ने पाच अत्यंत उपयुक्त ऐसी बाते कही...

*उन्होने कहा था,'' नर्क से हम छुट गये ऐसा मुझे लग रहा है|''
*दुसरी बात,''मेरा नया  जन्म हो रहा है ऐसा मै मानता हु |''
*तिसरी बात,'' आपकी जिम्मेदारी बडी है | आपके बारे में बाकी लोगो के मन में आदरभाव उत्पन्न होगा, मान सन्मान उत्पन्न होगा ऐसा कृत्य आपने करणा चाहिये | बौध्ह धम्म के दृष्टी से भारत कि भूमी फिलहाल शून्य है| इसीलिये उत्तम तरीके से धर्म का पालन करणे का निर्धार आपने करणा चाहिये | अगर ये बात हमने अच्छी तरह निभाई तो हम खुद का हि नही अपने साथ पुरे विश्व का भी उद्धार कर सकते है | "
*चौथी बात, '' मुझे कोई अंधभक्त नही चाहिये | बौद्ध धर्म में जिन्हे आना है उन्होने पुरे सोच विचार समेत आणा है, वो धर्म आपनी बुद्धी को ऱ्हास आणा चाहिये | जिन्हे मेरे साथ नही आना उन्हे कही और जाणे के लिये आजादी है |''

*और पाचवी  बात भगवान बुद्ध का धर्म सागर की तरह है| इस धर्म में सभी समान है | सागर में जाणे के बाद जिस तरह गंगा का पाणी या महानदी का पाणी पह्चानना मुश्कील हो जाता है | उस तरह बौध्ह धर्म में प्रवेश करणे के बाद अपनी जाती चली जाती है | सभी समान हो जाते है |''




*वास्तविकता 

लेकीन प्रत्यक्ष जीवन में ऐसा कुछ नही हुआ | हमने जाती - उपजाती की पहचान कायम रखी | रोटी व्यवहार शुरू रखा,लेकीन बेटी व्यवहार बंद हि रखा | आज उच्च शिक्षित लोग भी जातीयता की मानसिकता छोडणे के लिये तैयार नही | लेकीन बाकी लोगो ने उनसे जातीभेद नही करणा चाहिये ऐसा उन्हे मनोमन लगता है | जातपात मिटाने की बात भी बखुबी करते है | कुछ अत्यंत अल्प लोगो को छोड दिया जाये तो बौद्ध  लोग दैववादी, भगवान पर भरोसा करणे वाले दिखते है | अशिक्षित और शिक्षित बौद्ध लोग इनमे ज्यादा फर्क देखणे को नही मिलता | अनेको के घर देवालय होकर उनमें बाबासाहाब, गोतम बुद्ध कि मूर्ती के साथ बाकी हिंदू देवी- देवताओ कि तस्वीर देखणे को मिलती है |

बहुत से लोग हिंदू धर्म के  व्रत करते दिखाई देते है | मह्नुभाव पंथी होते है | अंधविश्वास मन में लिये फिरते है| सैलानी, पीर, तुरतपीर, हाजीअली आदी के साथ अनेको हिंदू देवी देवताओ को मानते है | बाबासाहाब के  उपदेश कि तरफ मुह फेरते दिखाई पडते है |

*बुद्धीजम कि प्रबलता 


बाबासाहाब ने कहा था,'' बौध्ह धर्म और हिंदू धर्म  धर्म अगर इनकी तुलना कि जाये तो हमारे एक बात ध्यान में आयेगी, बौद्ध धर्म का मुल नैतिक आचरण होकर हिंदू धर्म कि निव ही कर्मकांड का आचरण है | सिर्फ नैतिक आचरण का मतलब हि बौध्ह धर्म है | बौध्ह धर्म मे भगवान नही ये बात सत्य है | भगवान कि जगह बौद्ध धर्म में नैतिक आचरण ने  पुरी कि है | बौध्ह धर्म के अलावा दुसरा कोई भी अछुतो के लिये मुक्ती का मार्ग नही |''

ऐसा बताके भी रखा गया है | लेकीन अभी भी बौद्ध लोगो के आंख नही खुले है | कब खुलेंगे पता नही | एखाद अभ्यासू व्यक्ती बताने गया तो तुम्हे क्या समझ में आता है, चूप कर बोलके उसकी बात नही सुनेगे | धर्मांतर हुआ मतलब सिर्फ नामांतर हुआ कर्मांतर अभी भी नही हुआ |