जब बीच रास्ते में सावित्रीबाई फुले को बेअब्रू करणे कि धमकी मिली : तब क्या हुआ था पढिये - HUMAN

Breaking

Sunday, 25 November 2018

जब बीच रास्ते में सावित्रीबाई फुले को बेअब्रू करणे कि धमकी मिली : तब क्या हुआ था पढिये


कट्टरपंथीयो द्वारा किया गया स्त्री ज्ञानार्जन के कार्य का विरोध -

         उम्र के महज २१ साल मे ज्योतिबा ने स्त्री और शूद्रो के शिक्षा के कार्य को प्रारंभ किया और उनके इस कार्य मे साथ दिया उनकी पत्नी सावित्रीबाई ने जो की उस समय केवल १८ साल की थी | शनिवार पेठ मे शुरू किया गया ये  स्कुल पुरे भारत मे लडकियो का प्रथम स्कूल था | जिसमे शुरवात मे ६ लडकीयोने दाखिला किया था | उनमे ४ ब्राम्हण , १ धनगर और १ मराठा समाज की लडकी थी | अन्नपूर्णा जोशी ,सुमती मोकाशी ,दुर्गा देशमुख ,माधवी थत्ते ,सोनू पवार ,जनी करडिले ऐसे लडकियो के नाम थे |

               बहुजन समाज की औरत खुद शिक्षा लेके लडकियो को पढा रही इस बात का उस वक्त के सनातनी ब्राम्हण वर्ग को बहुत हि गुस्सा था | सावित्रीबाई के स्कूल के रास्ते मे खडे होकर उन्होने उन्हे तंग करना शुरू किया | गालीया देते ,पत्थर मारते ,कोई पान की पिचकारी तक उनपर डालते , गोबर और मानवी मल तक उनपर डाला गया | इसके चलते कर्तव्य निष्ठ आई सावित्रीआई अपने साथ हमेशा एक ज्यादा की साडी लेके चलती |






*कार्य के प्रती तत्पर सावित्री बाई


                 अपने कार्य के प्रती तत्पर सावित्री बाई ने यह सब सहते हुये अपना कार्य जरी रखा|  

        एक दिन की बात है .... सावित्रीबाई को जल्दी स्कूल पहुचना था | समाजकंटको को नजर अंदाज करते हुये वे स्कूल जा रही थी | ये औरत ऐसे मानणे वालो मे से नही है, यह सोचते हुये एक सनातनी सवर्ण ने उनको धमकी दि, कहा ''अगर कल इस रास्ते से गुजरती हुयी दिखी तो बीच रास्ते मे बेअब्रू करदी जाओगी '',|
          
          सावित्रीबाई कुछ ना कहते हुये उस दिन वहा से चली गयी | लेकीन पाठशालामे उनका मन नही लग रहा था | उनको बार बार दी गयी धमकी याद आ रही थी | सोच रही थी अगर कल इसने सचमे हाथ पकडा तो क्या करूंगी | चिंता से उस दिन उनका किसी भी कार्य मे मन नही लग रहा था | यह बात ज्योतिबा के ध्यान मे आयी |उन्होने सावित्रीबाई से इस बारे मे पूछा,तो सावित्रीबाई सुबह की घटना ज्योतीराव को बता दी | ज्योतिबा साहस बंधाते हुये बोले- ''अच्छे कार्य मे बाधाये तो आयेगी हि , अपने स्कूल अच्छे चल रहे है तो ये विरोध और भी बढेगा, तुम्हे पाठशाला पहुचाने के लिये एक सिपाही नियुक्त कर देता हु'' |  सावित्रीबाई को दिलासा मिला ,' ठीक है लेकीन फिर भी आज की धमकी कुछ अलग हि थी, उन्होने जोतीबा से पूछा कल फिर क्या करेंगे' | ज्योतिबा ने कहा ''तुम कल हमेशा की तरह पढाने जाणा, कुछ अंतर रख मै भी तुम्हारे पीछे से आऊंगा | ''


          अगले दिन एक सवर्ण ने कूछ बडबडीयाते हुये सावित्रीबाई का हाथ पकडणे की कोशिश की , सावित्रीबाई ने साहस के साथ उसके गाल पर कसके तमाचा रख दिया | सभी जन स्तब्ध होके देखते रह गये | ज्योतिबा वहा पहुचे और सावित्रीबाई से माफी मांगने को कहा |.. ये बहुत बडा तमाचा था उस वक्त के सनातनी क्रूर ब्राम्ह्नवादियो के मुह पर | देश के ऐसे महान दम्पती को कोटी कोटी नमन ...