क्या है प्रतीत्य समुत्पाद बुद्ध के अनुसार : जाणिये ... - HUMAN

Breaking

Sunday, 25 November 2018

क्या है प्रतीत्य समुत्पाद बुद्ध के अनुसार : जाणिये ...




*बिग बॅग थेअरी 


प्रतीत्य समुत्पाद मतलब लाॅ आॅफ काॅझेशन  समझा  तो पृथ्वी और उसके भीतर बसने वाले जीव जंतूओ की निर्मिती प्रक्रिया समझ मे आती है | विश्व की निर्मिती १५ अब्ज साल पहले जिस बिग बॅग के महाविस्फोट से हुई ऐसा वैज्ञानिक बताते है उसी बात को बुद्ध ने प्रतीत्यसमुत्पाद की भाषा मे विषद की है | पृथ्वी जिस जडमुल द्रव्य के मिश्रण से निर्मित हुई, उसी मिश्रण से धरती पर जिवो की उत्पत्ती हुई है, इंसान का निर्माण भी ऐसे ही  हुआ | बिग बॅग के पहले की और बाद की प्रक्रिया उत्क्रांती की प्रक्रिया है | इतना हि नही तो विश्व मे भी सतत नयी नयी घटनाये घटीत होती रहती है | हायड्रोजन, हेलिअम, इनका रूपांतरण जड मुलद्रव्यो मे अर्थात कार्बन, ऑक्सिजन, सिलिकाॅन , लोह इनमे होकर बडे बडे तारकावो की मौत और नये तारकावो की निर्मिती सतत होती रहती है | ये प्रक्रिया न रुकनेवाली है | प्रतीत्य समुत्पाद का सिद्धांत और उसी के भीतर से उत्पन्न होनेवाला अनित्यता का सिद्धांत इसी प्रक्रिया का निर्देश करता है , ये ध्यान मे रहना चाहिये | 

 इन सब विशाल अंतरीक्ष के घटनावो से इन्सान बंधा है | वह भी विश्व के परिवर्तन शृंखला का सभासद है | इसीलिये वो भी स्थिर नही | रुकना यह शब्द उसे लागू नही होता | 






डी. एन. ए. को इस जीवन का मूलाधार माना गया है | वो जिओ का मुल एकक है | स्टीफन हॉकिंग कहते है,' जिस तरह जीवो का डी. एन. ए . निर्मित हुआ | डी. एन . ए. मतलब the chemical in the cells of animal or a plant that controls what characteristics that animal or plant will have जानवर या वृक्ष इनके पेशी मे  उस जानवर या इन्सान का गुणविशेष तय करनेवाली रसायन जनुक मे जो बदल होता है वो बदल मुमकिन  है | अनित्यता का बुद्ध का सिद्धांत यही बताता है |  ऐसा बदल यही नैसर्गिक प्रक्रिया है | ये ध्यान मे लिये तो इन्सानी जीवन  स्थिर नही | इन्सान के जीवन मे ये शृंखला किसी ईश्वर द्वारा निर्मित नही हुई है ,तो कार्यकारण की अव्याहत शृंखला ना समझ लेणे से हुई है और अगर इस  शृंखला की उकल हुई तो असंख्य सवालो के जवाब इन्सान को मिल सकते है | स्टीफन हॉकिंग के भाषा मे कहे तो ... हमे अधिक समझदार और सुसंकृत होणा है तो, हमे स्वरचित उत्क्रांती के राह पर से गुजरना होगा