किस वजह से समता सैनिक दल का निर्माण बाबासाहाब को करना पडा था? - HUMAN

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Sunday, 2 December 2018

किस वजह से समता सैनिक दल का निर्माण बाबासाहाब को करना पडा था?


समता सैनिक दल - समता सैनिक दल संस्थापक
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ( 1927 )


बाबा साहेब की राजनीतिक दुरशाशिता किसी से छुपी हुई नहीं है , 27 सितंबर सन् 1925 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के बाद ही शायद बाबा साहेब को एह्सास  हो गया था की यह सगठन भारत के दलित और आदिवासी समाज को सत्ता से से दूर रखने का कार्य करेगा और कभी  उनको अपने समान न मान हमेशा दबाने  का प्रयास करेगा , इसलिए बाबा साहेब ने सामाजिक समता को स्थापित करने के लिए मुंबई में मार्च 1927 को "समता सैनिक दल"  स्थापित किया था | समता सैनिक दल  को स्थापित करने का कारण  था की दलित समाज में चेतना का विकास हो रहा था और वह अपने लिए समता की मांग करने लगे थे | इस कारण  उन को दबाने के प्रयास तेज़ हो गए | जगह जगह दलितों पर हमले तेज़ हो गए थे | तब बाबा साहेब की नज़र अपने आस पास मौजूद अपने समाज के  आर्मी के रिटायर जवानो पर पड़ी और बाबा साहेब ने उन्हें सगठित होने का आह्वान किया ताकि ऐसे हमलो से निपटा जा सके  और बाबा साहेब  के द्वारा ही "समता सैनिक दल" की इस प्रकार नीव पड़ी |

आज यह संगठन केवल आर्मी के जवानो का न रहकर समाज का सगठन हो गया है | इस में महिला ,पुरुष ,समाज के लड़के लड़कियों के कई संगठन काम कर रहे है | समता सैनिक दल ने भारतीय समाज में सामाजिक सदभाव निर्माण करने के लिए एवं शोषित, पीडित आणि पिछडे वर्गों के लिये अभूतपुर्व योगदान के कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है | इसलिए भारत सरकार ने डॉ॰ आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार (2012) से इसे सन्मानित किया हैं |  समता सैनिक दल का हेडक्वाटर्र  नागपुर की दीक्षाभूमि में है।

⭐⭐⭐डॉ बाबासाहेब आंबेडकर समता सैनिक को सन्देश⭐⭐⭐


मेरे समता सैनिक दल के शुर सिपाहियो...

आज इस संयुक्त प्रांत में पार्टी का दूसरा सत्र  है।पिछले 17 वर्षों से, इस दल का काम मुंबई और केंद्रीय प्रांतों में बड़े जोर से चल  रहा है ,कुछ साल पहले दोनों प्रांतों में, अपनी या दूसरे पक्ष  की सार्वजनिक संभा में  कांग्रेस के गुंडों दवरा हंगामा किया जाता था ।1 9 27 में, इस संगठन  की स्थापना मेरे हाथ में हुई थी। उस दिन से हमारी बैठक में कांग्रेस या किसी और सगठन के पास हमारे एक भी आदमी को हाथ लगाने की ताकत नहीं है ,एक बार मेरे कार्यालय के सामने विपक्षी  की एक बड़ी सार्वजनिक सभा  थी ,उस बैठक में, हमारे समता सैनिक  गए और बैठक की , मेज, कुर्सियों आदि पर कब्जा कर  उन्हें मेरे कार्यालय में ले आये  ।वे सामान आज भी मेरे पास वैसा ही है ,यह सभी सामान हमारे सैनको के कार्य का सूचक है ,यह बताने का उदेश्य  यह है की सैनिक इतने जिगरवाले  हैं।अगर वे मन  में लाएंगे तो  उन्हें सौंपा गया कार्य वह चुटकी में कर देंगे इतना मुझे उन पर विशवास है  इसलिए, इस "समता सैनिक दल" की शाखा  प्रांतों- प्रांतों में , कस्बों, शहरों, गांवों में स्थापित कर हमे शक्ति बढ़ानी ही होगी।

समता सैनिक दल के संस्थापक
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर

संदर्भ: -
 बाबासाहेब अम्बेडकर लेखन और भाषण खंड 18, भाग-2, पृष्ठ संख्या- 442.443







समता सैनिक के उद्देश्य 

१) समता सैनिक दल यह सामाजिक संघटन भारतिय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. बाबाबासाहेब आंबेडकर द्वारा स्थापित किया गया है. बाबासाहेब आंबेड्कर ने समता सैनिक दल के क्रियान्वयन के लिए एक कार्यपध्दती लिखित स्वरुप मे दी है, उसी प्रकार समता सैनिक दल के शाखाओ को कार्यरत रहना है.

२) 'व्यक्ति' समता सैनिक दल का केन्द्रबिंदु रहेगा. व्यक्ति आदर्श बनेगा तो परिवार, समाज और देश आदर्श बनेगा. यही समता सैनिक दल का मुख्य उद्देश्य है.

३) समता सैनिक दल व्यक्ति मे नैतिकता, अनुशासन, प्रज्ञा, एकता, राष्टप्रेम संस्कारित करेगा.

४) समता सैनिक दल व्यक्ति मे आंबेडकरी विचार संस्कारित करेगा.

५) समता सैनिक दल अपने सैनिको मे बाबासाहेब के विचारो प्रती, उन्होने स्थापित संघठना, संस्थाओ के प्रती तथा बाबासाहेब द्वारा लिखित ग्रंथसंपदा के प्रती सद्भाव, निष्ठा पैदा करेगा, उनके रक्षा और उनको प्रदुषित होने से रोखने के लिए सजग/जागृत करेगा.

६) समता सैनिक दल ऐसा नेतृत्व पैदा करने का काम करेगा जो समर्पित, निष्ठावान, निस्वार्थि और प्रज्ञावान हो.

७) समता सैनिक दल किसी प्रकार के मोर्चे नही निकालेगा, रास्ते के आंदोलन नही करेगा क्योंकि यह संघठन सिर्फ प्रशिक्षण देनेवाली मातृ संघठना का कार्य करेगी. वह अलग अलग क्षेत्रो के लिये अलग अलग इकाईया बनाएगी जैसे, मजदुरो के लिए मजदुर संघठन, विध्यार्थियो के लिए विध्यार्थि संघठन आदि. इन संघठनो के प्रमुख प्रशिक्षित समता सैनिक दल का सैनिक ही होगा. क्योंकि यह स्वाभाविक है कि कोई एक आदमी, संस्था समाज के हर क्षेत्र का काम नही कर सकती, इसलिए कार्यभार विविध इकाईयो मे बांटकर ही सुलभ किया जा सकता है. मोर्चे निकालना या नही, आंदोलन करना या नही यह सब बाते इन इकाईयो की अधिन रहेगी. समता सैनिक दल ऐसे शैक्षणिक, सामाजिक संस्थाओ को पुरस्कृत करेगा जो समाज मे समता, स्वतंत्रता, बंधुभाव, अनुशासन, नैतिकता, संयम निर्माण करने का भाव रखती हो.

८) समता सैनिक दल समाज और देश की एकता के लिए प्रयास करेगा.

९) समता सैनिक दल बौध्द धम्म का प्रचार करेगा, क्योंकि बौध्द धम्म ही ऐसा रास्ता है जो भारतिय संविधान के रास्ते के समान है.

१०) भारतिय संविधान समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व का पक्षधर है, बौध्द धम्म का उदय भी इन्ही तत्वो से हुवा है. इसलिए बौध्द धम्म का प्रचार करके संविधान के लिए अनुकूल परिस्थिती निर्माण हो सकती है. इसलिए बौध्द धम्म का प्रचार करना हर समता सैनिक का कर्तव्य होगा.

११) समता सैनिक दल समाज से जातिव्यवस्था, चातुर्व्यर्ण व्यवस्था, किसी भी तरह की विषमता, अंधविश्वास, कपोलकल्पित देव, देवता के प्रती श्रध्दा, अमानविय और फालतु रितिरिवाज, परंपरा, सन-उत्सव खत्म करने का प्रयास करेगा, और जो धर्म और धर्मग्रंथ इन बेतुकी बातो को आवश्यक मानती है और पनाह देती है, ऐसे धर्म और धर्मग्रंथो के विरोध मे जनता मे जागृती लाने का महत्वपूर्ण कार्य करेगा.


१२) समता सैनिक दल महिलाओ के प्रती सम्मान की भावना रखेगा, उनके उत्थान के लिए कार्य करेगा, उनके समस्याओ को लेकर संघर्ष करेगा.समाज मे महिला-पुरुष समानता का भाव पैदा करेगा.

१३) समाज का जो वंचित घटक, जो आज भी अपने हक और अधिकारो से दुर है उनके उत्थान, विकास और सामाजिक सुरक्षा के लिए समता सैनिक दल कार्य करेगा.

१४) समता सैनिक दल समाज के ऐसे लोगो के साथ वैचारिक मुकाबला करेगा जो समाज को विषमता और अंधश्रध्दा के रास्ते पर ले जाता हो.

१५) समता सैनिक दल दलित, आदिवासियो पर सवर्णो द्वारा किये जानेवाले अन्याय का मुकाबला करेगा. समता सैनिक दल अपने सैनिक को वैचारिकता, कराटे और लाठी काठी चलाने का प्रशिक्षन देगा.

१६) डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरने भारत तथा भारतिय समाज के विकास के लिये जो भी स्वप्न देखे, जो भी योजनाए रखी, उनके पुर्णत्व के लिये समता सैनिक दल संघर्ष करेगा.

१७) समता सैनिक दल समाज के शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान शिक्षा का प्रचार करेगा. साथही विध्यार्थियो मे सामाजिक दायित्व की भावना पैदा करेगा.

१८) '२२-प्रतिज्ञा' का प्रचार और प्रसार करने का काम समता सैनिक दल करेगा.

१९) समता सैनिक दल के सैनिको दो शत्रूओ से मुकाबला करना है. एक है बाहार का शत्रु जिसे हम विषमता का समर्थक (ब्राम्हणवादि और भांडवलदार) कहते है और दूसरा शत्रू है जो आंबेडकरी समाज को छिन्न विछिन्न करने का कार्य कर रहा है.

२०) समता सैनिक दल आंबेडकरवादी समाज मे एकता, अनुशासन पैदा करने का प्रयास करेगा.

२१) समता सैनिक दल समाज मे जो विविध संस्था और संघटनाए है उन्हे एकता के सुत्र मे बांधने का प्रयास करेगा.

२२) समता सैनिक दल बच्चो पर बुध्द और आंबेड्करवादी संस्कार करेगा. यह अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य होगा जिससे आनेवाली पिढियों मे बुध्द, आंबेडकर और भारतिय संविधान जिंदा रहेगा.

समता सैनिक दल का सैनिक बनने के लिए जातपात, धर्म, पंथ, अमिर गरिब, छोटा बडा इन बातो के लिए कोई स्थान नही होगा. हा, समता सैनिक दल का सैनिक बनने के लिए यह आवश्यक होगा कि वह समता का पक्षधर हो, जातपात और किसी भी प्रकार के विषमता का समर्थक न हो. वह राष्टभक्त हो और उसके मनमे संविधान के प्रती श्रध्दा हो.