जाणिये कैसे गाडगेबाबा ने एक ब्राम्हण कि बोलती बंद कर दी... - HUMAN

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Thursday, 20 December 2018

जाणिये कैसे गाडगेबाबा ने एक ब्राम्हण कि बोलती बंद कर दी...

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*सामाजिक क्राँति के अविरत स्रोत के वाहक संत गाडगे बाबा

आधुनिक भारत को जिन महापुरूषों पर गर्व होना चाहिए, उनमें राष्ट्रीय सन्त गाडगे बाबा का नाम भी सर्वोपरि है। मानवता के सच्चे हितैषी, सामाजिक समरसता के द्योतक यदि किसी को माना जाए तो वे थे संत गाडगे। वास्तव में गाडगे बाबा के जीवन, उनके कार्यों तथा उनके विचारों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम समाज और राष्ट्र को काफी कुछ दे सकते हैं। गाडगे बाबा ने अपने जीवन, विचार एवं कार्यों के माध्यम से समाज और राष्ट्र के सम्मुख एक अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किया, जिसकी आधुनिक भारत को वास्तव में महती आवश्यकता है।

महाराष्ट्र सहित समग्र भारत में सामाजिक समरता, राष्ट्रीय एकता, जन जागरण एवं सामाजिक क्राँति के अविरत स्रोत के वाहक संत गाडगे बाबा का जन्म महाराष्ट्र के अकोला जिले के खासपुर गाँव में धोबी परिवार में हुआ था। बाद में खासपुर गाँव का नाम बदल कर शेणगाव कर दिया गया। गाडगे बाबा का बचपन का नाम डेबूजी था। इस प्रकार उनका पूरा नाम डेबूजी झिंगराजी जाणोरकर था। उनके पिता का नाम झिंगरजी माता का नाम साखूबारई और कुल का नाम जाणोरकर था।






*अंधविश्वास के तीव्र विरोधक

बाबा का कीर्तन अशिक्षित, कमजोर, पिछडो के लिये था | अंधविश्वास के तीव्र विरोधक थे |
एक बार कि बात है..,
गाडगे महाराज नदी पर एक कुष्ठरोगी को नहला रहे थे | तब बाजू में एक ब्राम्हण पिंडदान करते हुये कौवे को बुला रहा था | यह देख बाबा ने उससे पुछा ये,''आप क्या कर रहे है ?'' ब्राम्हण ने कहा, ''मृत व्यक्ती के आत्मा को शांती मिलने हेतू पिंडदान कर रहा हु | स्वर्ग में उसतक भोज पहुचा रहा हु |'' यह सून बाबा ने नदी का पाणी बाहर फेकणा शुरू किया | वो पाणी ब्राम्हण के शरीर पर आणे लगा | तब ब्राम्हण ने कहा, '' ये बुढ्ढे ये क्या कर रहा है?''
बाबा ने कहा,''अपने खेती को पाणी दे रहा हु |'' ब्राम्हण ने पुछा, ''तुम्हारी खेती कहा है?'' बाबा ने कहा,''मेरी खेती अमरावती जिले के शेणगाव में है |'' यह सून ब्राम्हण ने गुस्से से कहा, ''तुम मूर्ख हो क्या ? यहा से नदी का पाणी उतनी दूर अमरावती के खेती में कैसे पहुच सकेगा?''

इसपर बाबा ने कहा, '' जिस तरह यहा से आपके पूर्वजो के लिये भोज  स्वर्ग तक पहुचेगा ! स्वर्ग कि तुलना में तो मेरी खेती वैसे भी पास है |" ऐसा कह्के बाबा ने उस ब्राम्हण कि बोलती बंद कर दि थी |''

*बेटे के मौत से भी विचलित ना होनेवाले महान संत 

एक बार कीर्तन करते वक्त किसी ने बाबा को उनके बेटे की देहांत खबर सुनाई, तब बाबा जोर जोर से भजन करणे लगे और कहने लगे.., ''असे गेले कोट्यानुकोटी,का रडू एकासाठी?''( ऐसे करोडो मर गये, फिर सिर्फ एक के लिये क्यो रोते बैठू ?) लोगो को समझ नही आ रहा था कि हुआ क्या है ? बाद उन्हे पता चला कि गाडगेबाबा के बेटे गोविंद का देहांत हुआ है| बेटे की मौत कि खबर सुनकर भी अपने समाज के जिम्मेदारीयो से बाबा जरा भी विचलित नही हुये |





डॉ.बाबासाहाब आंबेडकर के मृत्यू के पश्चात सिर्फ १४ दिन के अंतराल पर गाडगेबाबा कि मृत्यू हुई थी | क्योंकी बाबासाह्ब कि मृत्यू कि खबर सुनकर गम में उन्होने अन्न, जल का त्याग कर दिया था और उनके गम रोते रहते |

गाडगेबाबा जैसा संत अब पुनः पैदा होणा संभव हि नही है | संत गाडगेबाबा को हमारी और से स्नेहपूर्ण, भावपूर्ण श्रद्धांजली,कोटी कोटी नमन 🙏🌹🌹🌹

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