भीमा कोरेगाव द्वंद्व (पार्ट ७) : मराठा नहीं ब्राह्मणों के ख़िलाफ़ थी लड़ाई.... - HUMAN

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Monday, 31 December 2018

भीमा कोरेगाव द्वंद्व (पार्ट ७) : मराठा नहीं ब्राह्मणों के ख़िलाफ़ थी लड़ाई....

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 “ 'अस्पृश्यों' के साथ जो व्यवहार प्राचीन भारत में होता था, वही व्यवहार पेशवा शासकों ने महारों के साथ किया…!”

★दलित शौर्य का गौरवशाली इतिहास★


अस्मिता की लड़ाई


जो इतिहासकार महारों और पेशवा फ़ौजों के बीच हुए इस युद्ध को विदेशी आक्रांता अँग्रेज़ों के ख़िलाफ़ भारतीय शासकों के युद्ध के तौर पर देखते हैं, लेकिन जानकार मानते हैं कि महारों के लिए ये अँग्रेज़ों की नहीं बल्कि अपनी अस्मिता की लड़ाई थी.

अंत्यजों यानी वर्णव्यवस्था से बाहर माने गए 'अस्पृश्यों' के साथ जो व्यवहार प्राचीन भारत में होता था, वही व्यवहार पेशवा शासकों ने महारों के साथ किया.

इतिहासकारों ने कई जगहों पर ब्यौरे दिए हैं कि नगर में प्रवेश करते वक़्त महारों को अपनी कमर में एक झाड़ू बाँध कर चलना होता था ताकि उनके 'प्रदूषित और अपवित्र' पैरों के निशान उनके पीछे घिसटने इस झाड़ू से मिटते चले जाएँ.

उन्हें अपने गले में एक बरतन भी लटकाना होता था ताकि वो उसमें थूक सकें और उनके थूक से कोई सवर्ण 'प्रदूषित और अपवित्र' न हो जाए. वो सवर्णों के कुएँ या पोखर से पानी निकालने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे.




 “महारों ने मराठों को नहीं बल्कि ब्राह्मणों को हराया था…!”

''मराठा नहीं ब्राह्मणों के ख़िलाफ़ थी लड़ाई''


इतिहासकार और आलोचक प्रो. रुषिकेश काम्बले कोरेगांव भीमा का दूसरा पक्ष भी बताते हैं. उनका दावा है कि कि महारों ने मराठों को नहीं बल्कि ब्राह्मणों को हराया था. ब्राह्मणों ने छुआछूत जबरन दलितों पर थोप दिया था और वो इससे नाराज़ थे. जब महारो ने ब्राह्मणों से इसे ख़त्म करने को कहा तो वे नहीं माने और इसी वजह से वो ब्रिटिश फ़ौज से मिल गए.

ब्रिटिश फ़ौज ने महारों को ट्रेनिंग दी और पेशवाई के ख़िलाफ़ लड़ने की प्रेरणा दी. मराठा शक्ति के नाम पर जो ब्राह्मणों की पेशवाई थी ये लड़ाई दरअसल, उनके ख़िलाफ़ थी और महारों ने उन्हें हराया. ये मराठों के ख़िलाफ़ लड़ाई तो कतई नहीं थी.

काम्बले कहते हैं कि महारों और मराठों के ख़िलाफ़ किसी तरह का मतभेद या झगड़ा था, ऐसा इतिहास में कहीं नहीं है. अगर ब्राह्मण छुआछूत ख़त्म कर देते तो शायद ये लड़ाई नहीं होती.

वो कहते हैं कि मराठों का नाम इसमें इसलिए लाया जाता है क्योंकि ब्राह्मणों ने मराठों से पेशवाई छीनी थी. ये आखिरी पेशवा ताकत थी और ब्रिटिश उन्हें हराना चाहते थे. इसीलिए ब्रितानी फ़ौज ने महारों को साथ लिया और पेशवा राज ख़त्म कर दिया.