मृत्यू के पश्चात भी मनुवादियो जातीवादी जहरीली सोच का सामना करणा पडा था बाबासाहाब को - HUMAN

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Tuesday, 4 December 2018

मृत्यू के पश्चात भी मनुवादियो जातीवादी जहरीली सोच का सामना करणा पडा था बाबासाहाब को



अंतिम सफर 


6 दिसम्बर 1056 को सुबह ही बाबासाहब हमे छोड़ चले जाने की खबर सुदाम बाबा (बाबासाहब के खवय्ये) ने दी। नानकचंद ने दिल्ली के सभी न्यूज चैनल वालो को यह खबर दी।11:55 बजे मुंबई के पी. ई. सोसायटी के ऑफिस में फोन किया।

घनश्याम तलवटकर इन्हें प्रथम खबर मिली। उसके बाद औरंगाबाद को फोन कर बलवंतराव और वराले इन्हें ये दुखद खबर मिली। उसके बाद हवा की तरह ये खबर फ़ैल गयी।

दिल्ली के निवासस्थान पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और बाक़ी मंत्रियो ने भेट दी।

श्याम 4:30 को बाबासाहब का पार्थिव देह ट्रक से दिल्ली एयरपोर्ट पर लाया गया। बाबासाहब का अंतिम सफर शुरू हुआ। रात 9 बजे हवाईजहाज नागपुर में आया। जिस जगह दीक्षा समारंभ हुआ उस जगह बाबासाहब का देह अंतिम दर्शन के लिए 9 से 12 बजेतक रखा गया।

12 बजे ये हवाई जहाज नागपुर से निकला और रात 1:50 को मुंबई के संताक्रूझ हवाई अड्डे पर पहुचा। उस जगह लाखो की तादाद में लोग मौजूद थे। वहा से बाबासाहब को राजगृह पर लाया गया। उस जगह प्रचंड आक्रोश शुरू था। बाबा के अंतिम संस्कार की शुरवात हुयी।

लेकिन सवर्णों ने अंतिम संस्कार को जगह नही दी। हिंदू कॉलनी के हिंदू समशान में अंतिम संस्कार ना करने देने की चर्चा सवर्णों में हुयी थीं शायद। तब कार्यकर्ता बेचैन हुए लेकिन उन्होंने फैसला किया। मैं हिंदू के रूप में नही मरूंगा ऐसी प्रतिज्ञा करने वाले बाबा का अंतिम संस्कार हिंदू के समशान में क्यों?

मृतावस्था में डॉ. बाबासाहब अंबेडकर


इतनी बड़ी भिड़ को ध्यान में रखते हुए उनका अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क पर करना मंजूर हुआ। लेकिन तत्कालीन म्युनिसिपल कमिश्नर पी. आर. नायक इन्होंने इंकार किया और परमिशन नही दी। उसके बाद अभी स्थित अंबेडकर विद्यालय मैदान खुला था। वहा अंतिम संस्कार करना निश्चित किया गया।लेकिन वह जगह कॉंग्रेस ने देने के लिए विरोध किया। तब बाबासाहब के निकटवर्ती कार्यकर्ता सी. के. बोले इनकी खुद की जगह थीं। उस जगह अंतिम संस्कार करने को कहा गया। और उस जगह बौद्ध धम्म विधिनुसार भिक्खु एच. धर्मानंद इनके उपस्थिति में भदंत आनंद कौशल इनके हस्ते ये अंतिम संस्कार पूरा हुआ और बाबासाहब नाम का प्रचंड, झुंजार ज्वालाग्नी शांत हुआ।

सोचो दोस्तों बाबासाहब के मृत्यु पश्चात भी कितना कड़ा विरोध इन लोगो ने किया। अपना पूरा जीवन हमारे-आप के लिए उन्होंने समर्पित किया फिर हम बाबासाहब के साथ बेईमानी क्यों कर रहे हैं।

बाबा से बेईमानी ना करो,अब तो एक हो जाओ। दिन ब दिन जातिवादी, मनुवादी लोग छल रहे हैं उनसे मुकाबला करने के लिए तैयार रहो। बहुत कुछ दिया हैं बाबासाहब ने, कभी ना खत्म होनेवाला खजाना फ़िर दुसरो की दलाली क्यों?

जय भिम और सिर्फ जय भीम ही🙏