तथागत गोतम बुद्ध के बताये हुये दो धर्म ... - HUMAN

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Wednesday, 5 December 2018

तथागत गोतम बुद्ध के बताये हुये दो धर्म ...

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बुद्ध ने दो धर्म बतायें है...

एक कालसंगत और दूसरा कालबाह्य।

बुद्ध कहते हैं कि दुनिया में प्रत्येक चीज प्रत्येक क्षण परीवर्तनशील है। कुछ परिवर्तन के साथ समाप्त हो जाती है, खत्म हो जाती है, कालबाह्य हो जाती है। जो धर्म कालबाह्य हो गया उसे छोड़ देना चाहिए। जो कालबाह्य धर्म को पकड़कर रखेगा, वह सनातनी कहलाएगा।।ऐसे कहा जाएगा कि यह आदमी परिवर्तन को नहीं मानता। इसके विपरीत, जो कालसंगत है उसे ग्रहण करो। उसका निरंतर विकास करते रहो। दुनिया आप के लिए रुकनेवाली नहीं है। दुनिया आगे बढ़ेगी। अगर आप दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चलोगे तो दुनिया आप को पीछे छोड़ देगी। क्योंकि दुनिया परीवर्तनशील है।

कोई भी स्थिर चीज विनाश को आमंत्रण करती है इसलिए परिवर्तनशील बनो और धर्म वह नही है जिसके लिए आप लड़ मर रहे हैं। धर्म एक वचन है, धर्म एक मुद्रा है, धर्म चिंतन है। बेहतरी और प्रगति का चिंतन। शांत चित्त और मनन का स्वरूप है धर्म। आप जिसे पूजा पाठ , कर्म कांड, लाठी डंडों से स्थापित करना चाहते हैं वह धर्म नही बल्कि कुछ स्वार्थी गिरोह है। जिनके चुंगल में फंसकर कोई भी मनुष्य बाहर नही निकल सकता और उसके लिए चिंतन, मनन सब व्यर्थ है। अब आप स्वयं समझिये कि आप कैसे हैं और क्या है?