६ दिसंबर १९५६ से ३ दिन पहले ३ दिसंबर १९५६ ये बात : पढिये जरूर दिल भर आयेगा - HUMAN

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Monday, 3 December 2018

६ दिसंबर १९५६ से ३ दिन पहले ३ दिसंबर १९५६ ये बात : पढिये जरूर दिल भर आयेगा

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सोमवार ३ दिसंबर १९५६ को उन्होने ( बाबासाहाब) ने जो कुछ भी लिखा था, उसे रक्तु से टाईप करके मांगा | उसके बाद तुरंत नानकचंद को साथ लेकर बाबासाहाब अपने बिमार बुजुर्ग माली से मिलने उसके घर गये | बाबासाहाब को देख उस बुजुर्ग माली के आंखो में आसू आ गये | भारी, भिगे स्वर में उसने कहा , ''आज खुद भगवान मेरे घर आये|'' उसने अपने दोनो हाथो से बाबासाहाब का हाथ अपने हाथ में लिया और अपने माथे से लगाया | वो रोते रोते कहने लगा,''मुझे मौत से पहले साक्षात भगवान के दर्शन हुये है, ये मेरे लिये सौभाग्य कि बात है | ''

डॉ. बाबासाहाब अम्बेडकर ने  उस माली को समझाते हुये कहा, ''अरे रो मत !'' दवा लो ठीक हो जाओगे ! मै दवा भेज देता हु | मौत तो अटल है लेकीन दवा दारू से थोडा आराम मिलता है और उसे सामने भी ढ्केला जा सकता है | मौत से क्यो इतना डरते हो ? अरे सबको एक ना एक दिन तो मरणा हि है | मुझे भी एक ना एक दिन जाणा ही है | मौत से कोई भी नही छुटा है | तुम शांत हो जाओ और मै भेजता हु वो दवा ले लेना |'' इस तरह से उस माली को समझाकर और धीरज बंधाते हुये बाबासाहाब लौट गये | उन्होने माली के लिये जो दवा चाहिये थी उसे मंगवा कर माली को भेज दी |




माली को ३ दिसंबर १९५६ को समझाते हुये, बाबासाहाब ने कहा था ''मौत से कौन छुटा है, मुझे भी एक ना एक दिन जाणा हि है |'' ऐसा कहने वाले बाबासाहाब ६ दिसंबर १९५६ को हमे छोड चले जाते है | है ना संयोग कि बात !